कानपुर में सुसाइड: "मैं हार गया, पापा जीत गए..."—न्यायालय भवन की 5वीं मंजिल से कूदकर विधि स्नातक ने दी जान

कानपुर में सुसाइड: "मैं हार गया, पापा जीत गए..."—न्यायालय भवन की 5वीं मंजिल से कूदकर विधि स्नातक ने दी जान

Kanpur suicide:

Kanpur suicide: "I lost, my father won..."

कानपुर। Kanpur suicide: "I lost, my father won..." बचपन से ही मुझे मानसिक यातनाएं मिलनी शुरू हो गई थीं। पढ़ाई का जरूरत से ज्यादा प्रेशर, मारपीट, हर समय शक की नजरों से देखना और हर एक मिनट का हिसाब लेना... यह टार्चर है। मैं हार गया, पापा जीत गए...। लव यू मम्मी और बहन। दो पेज के सुसाइड नोट में ये बातें लिखकर बर्रा आठ वरुण विहार निवासी 23 वर्षीय विधि स्नातक ने गुरुवार दोपहर न्यायालय भवन की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी।

आत्महत्या से 15 मिनट पहले उन्होंने फेसबुक पर सुसाइड नोट पोस्ट किया और पिता व एक दोस्त को भी भेजा था। घटना कचहरी परिसर में लगे कैमरे में कैद हुई है। सुसाइड नोट में स्वजनों पर शोषण और बेइज्जत करने का आरोप लगाया है। घटना की जानकारी पाकर जिला जज अनमोल पाल समेत अन्य न्यायिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

अधिवक्ता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के पुत्र प्रियांशु श्रीवास्तव कचहरी में पिता के चेंबर में उनके साथ काम करते थे। बीते वर्ष प्रियांशु ने डीसी ला कालेज से कानून की डिग्री हासिल की थी। बार कौंसिल में पंजीकरण के लिए भी आवेदन किया था। गुरुवार दोपहर प्रियांशु न्यायालय भवन की पांचवीं मंजिल पर पहुंचे और खिड़की की रेलिंग पर बैठ गए।

करीब 10 मिनट तक बैठे रहने के बाद वह कूद गए। प्रियांशु जिस जगह गिरे, वहां कोई आता-जाता नहीं है। रास्ता भी बंद है। बार एसोसिएशन और लायर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ ही जिला जज भी चैनल खुलवाकर मौके पर पहुंचे। प्रियांशु को उर्सुला अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

पुलिस जांच में पता चला कि प्रियांशु ने दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर दो पेज का सुसाइड नोट लिखा। आत्महत्या से 21 मिनट पहले इसे अपने वाट्सएप पर स्टेट्स लगाया। नोट अपने पिता और दोस्तों को भी भेजा। स्वजन और दोस्त सुसाइड नोट देखते उससे पहले ही प्रियांशु ने छत से कूदकर जान दे दी। डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि दो पेज का सुसाइड नोट मिला है। पिता की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

बदहवास पिता कुछ बोल न सके: प्रियांशु के आत्महत्या करने पर पिता बदहवास दिखे। उनसे बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उनकी आंखों से बेबसी के आंसू छलकते रहे। एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि अभी बार कौंसिल में बेटे का पंजीकरण नहीं हुआ था।

सुसाइड नोट: सख्ती और प्रेम इस सीमा तक भी न हो कि वह नफरत में बदल जाए

दो पेज के सुसाइड नोट में प्रियांशु ने स्वजन पर शोषण और प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इसके प्रमुख अंश कुछ इस प्रकार हैं... मैं प्रियांशु श्रीवास्तव आज बिना किसी जोर-जबरदस्ती के यह सुसाइड नोट लिखकर जान दे रहा हूं। पांच-छह वर्ष की उम्र से ही मुझे मानसिक यातनाएं मिलनी शुरू हो गईं। पढ़ाई के लिए जरूरत से ज्यादा प्रेशर करना, परीक्षा से एक दिन पहले सिलेबस पूरा तैयार होने पर मारने लग जाना... ये सब तो एक हद तक समझ आता है, लेकिन शक की नजरों से देखना, एक-एक मिनट का हिसाब लेना... कहीं न कहीं ये टार्चर ही है। सख्ती, लगाव और प्रेम इस सीमा तक भी नहीं होना चाहिए कि वह नफरत में बदल जाए। मैं दिन भर पिता के कचहरी के काम में उनका सहयोग कर उनका कार्यभार कम करने की कोशिश करता हूं। न ही मेरे कोई गलत शौक हैं, न मैं किसी गलत संगत में हूं। उन्हें उनकी जीत मुबारक हो।

स्टेनोग्राफर ने भी की थी आत्महत्या

पिछले वर्ष 18 अक्टूबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन में स्टेनोग्राफर 25 वर्षीय नेहा संखवार ने कोर्ट परिसर की छठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। उनके स्वजनों ने साथी कर्मचारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। कोतवाली पुलिस ने पेशकार की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई थी।