जालंधर बीएसएफ ब्लास्ट: दूसरी बार सीन रीक्रिएट, मास्टरमाइंड 'शहजाद भट्टी' के लिए बनाया गया था धमाके का लाइव वीडियो
Jalandhar BSF blast: Scene recreated for the second
जालंधर। जालंधर में बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर हुए बम ब्लास्ट मामले में शनिवार को भी जालंधर पुलिस ने गिरफ्तार दो आरोपितों यूपी के अनिल शर्मा और जीरकपुर के टैक्सी ड्राइवर उमरदीन उर्फ मुनीर खान को घटनास्थल पर ले जाकर दूसरी बार सीन रीक्रिएट करवाया।
इस दौरान पुलिस ने यह जानने की कोशिश की कि आरोपित मौके तक कैसे पहुंचे, किस जगह पर बम रखा गया और धमाके के बाद वे किन-किन स्थानों पर गए। मिनट-दर-मिनट जांच टीम ने आरोपितों से पूरे घटनाक्रम को दोबारा दोहराया और हर गतिविधि की बारीकी से पड़ताल की।
गिरफ्तार आरोपित अनिल शर्मा और उमरदीन को अदालत से सात दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। इस दौरान पूछताछ में कई तथ्य सामने आए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने वारदात को अंजाम देने से पहले करीब तीन दिन तक इलाके की रेकी की थी।
तीन दिन तक रेकी, डिलीट डाटा की रिकवरी और धमाके वाला वीडियो...जालंधर बम ब्लास्ट मामले में पुलिस ने किए बड़े खुलासे
उमरदीन इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी
इस दौरान वे कई लोगों के संपर्क में रहे और लगातार मूवमेंट करते रहे। पुलिस को पूछताछ में कुछ नए नाम भी मिले हैं, जिन्हें जल्द जांच में शामिल किया जा सकता है। आरोपित उमरदीन इस पूरे नेटवर्क में अहम कड़ी माना जा रहा है।
पुलिस का दावा है कि उमरदीन सीधे तौर पर शहजाद भट्टी के संपर्क में था। पूछताछ में सामने आया कि धमाके के तुरंत बाद उमरदीन ने शहजाद भट्टी को घटना की जानकारी दी थी। उसने धमाके के बाद मौके की वीडियो भी बनवाई थी। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वीडियो भट्टी के अलावा और किसे भेजी गई।
इसके पीछे किस नेटवर्क की भूमिका थी-फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा मोबाइल
इसी कड़ी में पुलिस ने उमरदीन का मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। शुरुआती जांच में मोबाइल से वीडियो बरामद नहीं हो सकी, जिसके बाद डिजिटल और डिलीट डाटा रिकवर करने के लिए फॉरेंसिक टीम की मदद ली जा रही है।
मोबाइक से मिल सकते हैं अहम सुराग
अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल से कई अहम सुराग मिल सकते हैं, जिससे पूरे मॉड्यूल और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचना आसान होगा। मोबाइल की जांच के दौरान कुछ और संदिग्ध लोगों के नाम सामने आए हैं।
पुलिस अब उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आरोपितों को वारदात को अंजाम देने से पहले उन्हें लोकल स्तर पर मदद मिली थी। इसी कारण पुलिस उन सभी लोगों की काल डिटेल, लोकेशन और संपर्कों को खंगाल रही है, जो आरोपितों के संपर्क में थे। फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल डाटा मिलने के बाद इस मामले में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं।