चण्डीगढ़ बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ अन्याय: रिटायरमेंट लाभ से वंचित, यूनियन का आरोप

चण्डीगढ़ बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ अन्याय: रिटायरमेंट लाभ से वंचित, यूनियन का आरोप

Injustice to Chandigarh Electricity Department Employees

Injustice to Chandigarh Electricity Department Employees

1 फरवरी 2025 को चण्डीगढ़ प्रशासन से निजी कम्पनी सीपीडीएल में भेजे गए  किसी भी रिटायर हुए कर्मचारी को एक भी पैसा नहीं मिला। दोषियों से हर्जाना दिलाने की प्रशासक महोदय से की अपील। 

चण्डीगढ़ 8 जनवरी: Injustice to Chandigarh Electricity Department Employees: चण्डीगढ़ प्रशासन के बिजली विभाग से निजी कम्पनी सीपीडीएल में जबरदस्ती बिना आप्सन लिये 1 साल के लिए अस्थाई तौर पर भेजे गये 340 के करीब कर्मचारी नरक का जीवन बिता रहे हैं। प्रशासन व कम्पनी में उनकी दुख तकलीफ को सुनने वाला कोई नहीं है। 1 फरवरी 2025 को प्रशासन से सीपीडीएल में 349 कर्मचारीयों को उनकी मर्जी के बिना  गैर कानूनी तौर पर धकेल दिया। जिनमें 5 कर्मचारी नौकरी छोड़ गये, तथा 5 रिटायर हो गये।एक कर्मचारी ने 5 महिने पहले वी आर एस दी थी जो अभी तक मंजूर नहीं हुई। प्रशासन मंजूरी दे नहीं रहा तथा कम्पनी का कहना है कि उनके पास वी आर एस की कोई स्कीम नहीं है। कर्मचारी डैथ बैड पर है कहां जाये। जो पांच कर्मचारी इन 11 महिनों में रिटायर हुए उन्हें एक पाई भी नहीं मिली है। प्रशासन कम्पनी पर तथा कम्पनी प्रशासन पर जिम्मेवारी डाल कर अपना अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। यहां तक कि कर्मचारियों का अपना जमा किया जी पी एफ भी नहीं दिया जा रहा है, जबकि चंडीगढ़ प्रशासन से 1 महिने पहले ही रिटायर हुए कर्मचारी अपने रिटायरी बेनिफिट ले चुके हैं । लेकिन प्रशासन में 37 साल से 40 साल की नौकरी पूरी कर चुके  जिन कर्मचारियों को जबरदस्ती बिना ऑप्शन के निजी कंपनी में धकेला गया उन्हें रिटायरमेंट होने के 9 महीने बाद भी बकाया नहीं दिए जा रहे हैं। रिटायरमेंट का लाभ न  देकर प्रशासन के अधिकारी सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ाकर बदले की भावना से काम कर रहे हैं। जिनके खिलाफ कार्यवाही कर कोर्ट के व ए जी की हिदायतों के अनुसार जुर्माना लगाया जाये। आज एक प्रैस वार्ता में खुलासा करते हुए यूनियन के प्रधान अमरीक सिंह उप प्रधान गुरमीत सिंह तथा महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों व कम्पनी दोनों को दोषी ठहराकर कटघरे में खड़ा किया तथा आरोप लगाया कि प्रशासन व निजी कंपनी के अधिकारी बदले की भावना से काम कर तमाशबीन बने हुए हैं, उन्होंने माननीय प्रशासक महोदय से शीघ्र संज्ञान लेकर अधिकारियों पर नकेल कसने की अपील की है  उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 5 महिनों में कर्मचारियों को हाउस लोन व बच्चों की शादी आदि कामों के लिए नियमों के मुताबिक जीपीएफ भी नहीं दिया जा रहा तथा  कर्मचारी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। 

    यूनियन के पदाधिकारियों ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार का आत्म निर्भर भारत व केन्द्रीय कैबिनेट का फैसला सिर्फ वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) के निजीकरण का था जो 31 जनवरी की नोटिफिकेशन से साबित हो जाता है जिसमें कहा गया है कि एसटीयू व एस एल डी सी के असैट कम्पनी को ट्रांसफर नहीं होंगे लेकिन अधिकारियों ने उच्चधिकारियों व सरकार को अंधेरे में रखकर ट्रांसमिशन के असैट भी कम्पनी को सौपने का फैसला कर भी कर्मचारियों के साथ अन्याय किया है अगर ट्रांसमिशन के असैट कम्पनी को नहीं दिये जाते तो 250 के करीब कर्मचारी विभाग में अडजैस्ट हो सकते थे लेकिन अधिकारियों ने गलत आर एफ पी बनाकर ट्रांसमिशन के एसैट भी डिस्ट्रीब्यूशन में डालकर नियमों की उल्लंघना की है, जिसकी  प्रशासक महोदय से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। तथा जांच पूरी होने तक एस टी यू के ऐसेट कंपनी को हैंड ओवर न कराने की अपील की है ।इस सम्बन्ध में शीघ्र ही यूनियन की मीटिंग बुलाकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान भी किया जायेगा तथा इस प्रकरण में शामिल अधिकारियों का कच्चा चिट्ठा भी खोला जाएगा।