उत्तर प्रदेश में ड्रापआउट रोकने के लिए नए ट्रैकिंग सिस्टम का कार्यान्वयन
Implementation of a New Tracking System
लखनऊ। Implementation of a New Tracking System, परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन के बाद बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों पर अब पूरी निगरानी रहेगी। नए शैक्षणिक सत्र से पूरे प्रदेश में एक ऐसी ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे किसी भी छात्र के स्कूल से दूर होते ही संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचना मिल जाएगी।
इस नई प्रणाली के तहत यदि कोई छात्र नामांकन के बाद विद्यालय आना बंद करता है या लगातार अनुपस्थित रहता है, तो इसकी जानकारी मैसेज के माध्यम से स्कूल, ग्राम प्रधान और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) और जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) तक पहुंच जाएगी।
इससे समय रहते छात्रों की पहचान कर उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। यह व्यवस्था पहले देवीपाटन मंडल में यूनिसेफ के सहयोग से लागू की गई थी, जहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। छात्रों की उपस्थिति बढ़ी और ड्रापआउट के मामलों में कमी आई। इसी सफलता को देखते हुए अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है।
चिन्हित छात्रों के घर जाएगी शिक्षकों की टीम
ट्रैकिंग सिस्टम के जरिये चिन्हित छात्रों के घर शिक्षकों की टीम जाएगी और अभिभावकों से सीधे संवाद कर स्कूल छोड़ने के कारणों की जानकारी जुटाएगी। यदि कारण आर्थिक, सामाजिक या अन्य किसी प्रकार की समस्या से जुड़ा पाया जाता है, तो शासन की योजनाओं के माध्यम से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि छात्र फिर से पढ़ाई से जुड़ सके।
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा पूरी तरह निश्शुल्क है। छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, मिड-डे मील समेत कई सुविधाएं दी जा रही हैं।
इसके बावजूद यदि कोई बच्चा स्कूल से दूर होता है, तो उसे चिन्हित कर हर हाल में वापस लाना प्राथमिकता होगी। यह व्यवस्था न सिर्फ ड्रापआउट दर को कम करेगी, बल्कि ‘हर बच्चे तक शिक्षा’ के लक्ष्य को भी मजबूती देगी।