पति द्वारा आय छिपाना गंभीर, हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया
Husband Concealing Income Is a Serious Matter
लखनऊ। Husband Concealing Income Is a Serious Matter, इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने घरेलू हिंसा व भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में पति द्वारा आय छिपाने को गंभीर मानते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में वास्तविक आय बताना अत्यंत आवश्यक है। ट्रायल कोर्ट पति को आय, संपत्ति का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने को बाध्य कर सकता है। यह आदेश जस्टिस बृज राज सिंह की एकल पीठ ने पत्नी और उसके नाबालिग पुत्र की ओर से बीएनएसएस की धारा 528 के तहत दाखिल याचिका पर पारित किया।
याचिका में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम लखनऊ के 19 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पति से आयकर रिटर्न और अन्य वित्तीय दस्तावेज तलब करने की अर्जी खारिज कर दी गई थी। मामले के अनुसार, पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रहे प्रकरण में आरोप लगाया था कि उसका पति अपनी वास्तविक आय छिपा रहा है और खुद को कम आय वाला व्यक्ति बताकर भरण-पोषण से बचने का प्रयास कर रहा है।
इसी के मद्देनजर पत्नी ने बीएनएसएस की धारा 91 के तहत आवेदन देकर पति के आयकर रिटर्न और अन्य वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत करने का अनुरोध किया था, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आयकर विभाग से पति के पिछले दो वर्षों के आयकर रिटर्न मंगवाए।
इसमें सामने आया कि पति पेशे से आर्किटेक्ट है और उसकी वार्षिक आय लगभग 4.85 लाख से 5.07 लाख रुपये के बीच है, जबकि ट्रायल कोर्ट में उसने खुद को श्रमिक बताया था।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के राजनेश बनाम नेहा (2021) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आय और संपत्ति के सही जानकारी के लिए दस्तावेज मंगवाना न्यायसंगत है। बिना इनके अर्जी खारिज करना उचित नहीं था।
हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद करते हुए मामले को पुनः विचार के लिए वापस भेज दिया और छह सप्ताह के भीतर नया निर्णय लेने का निर्देश दिया। साथ ही पत्नी को पति के आयकर रिटर्न की प्रति उपलब्ध कराने का आदेश भी दिया।