हिमाचल में नई पंचायतों का उदय: विकास की आस और '154 करोड़' के खर्च का वित्तीय बोझ

हिमाचल में नई पंचायतों का उदय: विकास की आस और '154 करोड़' के खर्च का वित्तीय बोझ

Hope for development and the financial burden

Hope for development and the financial burden

शिमला। हिमाचल प्रदेश में नई पंचायतों के गठन का कार्य जारी है। अब तक 43 नई पंचायतें बन चुकी हैं, जबकि 84 के गठन के लिए आपत्तियों और सुझावों का निपटारा किया जा रहा है। प्रत्येक पंचायत के लिए वार्षिक खर्च का अनुमान 1.20 करोड़ रुपये है। प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए कुल 154 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च एक बड़ी चुनौती है।

नई पंचायतों के गठन के बाद भवन, स्टाफ, फर्नीचर, आधारभूत ढांचे और प्रारंभिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर लगभग 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।

आर्थिक तंगी के बीच बढ़ेगा खर्च

वित्त विभाग के अनुसार, प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पहले से ही दबाव में है। नई पंचायतों के गठन के बाद वेतन, कार्यालय व्यय, विकास कार्यों और अन्य प्रशासनिक मदों पर होने वाला खर्च बढ़ेगा। 

यह लाभ भी होगा

हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि नई पंचायतों के गठन से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं निकट मिलेंगी। ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, पेंशन, मनरेगा, आवास योजनाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।

यह अतिरिक्त खर्च भी जुड़ेगा

पंचायत सचिव, सहायक, सफाई कर्मचारी और अन्य कर्मियों पर सालाना 25-30 लाख रुपये का खर्च आएगा। आधारभूत सुविधाओं पर 15 से 20 लाख रुपये का खर्च होगा। इसके अलावा, पंचायत घर निर्माण और विकास कार्यों के लिए बजट का अलग से प्रावधान आवश्यक है। पंचायत प्रधान, उपप्रधान और वार्ड पंचों के लिए मानदेय और ग्रामसभा बैठकों के खर्च भी शामिल हैं।