हिमाचल प्रदेश: राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में सियासी हलचल, प्रत्याशी के नाम की घोषणा जल्द
Himachal Pradesh: Political stir in Congress
शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस सरकार के लिए यह चुनाव सियासी परीक्षा लेने को तैयार है। कांग्रेस अभी प्रत्याशी को लेकर चिंता में है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व ही प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा।
20 फरवरी को मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सहित पूरा मंत्रिमंडल दिल्ली गया था। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ बैठक हुई थी। इस बैठक के अगले दिन उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री व कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने पार्टी शीर्ष नेतृत्व से अलग से भी मुलाकात की थी।
नामांकन से पहले खुलेंगे पत्ते
नामांकन से ठीक पहले ही प्रत्याशी के नाम की घोषणा की जाएगी। नामांकन की अंतिम तिथि पांच मार्च है। सूत्रों की मानें तो तीन या चार मार्च को मुख्यमंत्री व कांग्रेस अध्यक्ष दिल्ली जा सकते हैं। शीर्ष नेतृत्व से बैठक में प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
विधायक दल की बैठक में हो सकती है घोषणा
विधायक दल की बैठक बुलाकर प्रत्याशी के नाम की घोषणा हो सकती है। वर्ष 2024 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने जो गलतियां दोहराई थी वह इस बार नहीं दोहराएगी। राज्यसभा चुनाव के लिए 16 मार्च को मतदान होना है।
पाटिल की चर्चा, सिंघवी का कार्यकाल भी नौ अप्रैल तक
कांग्रेस प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल को हिमाचल से राज्यसभा भेजने की चर्चाएं कार्यकर्ताओं के बीच सबसे तेज है। वहीं डा. अभिषेक मनु सिंघवी का कार्यकाल भी नौ अप्रैल को समाप्त हो रहा है। डा. सिंघवी को कांग्रेस ने पिछली बार हिमाचल से चुनावी मैदान में उतारा था। सत्ता में होते हुए भी कांग्रेस यह चुनाव हार गई थी। जिसके बाद कांग्रेस हाइकमान ने उन्हें तेलंगाना से प्रत्याशी बनाकर राज्यसभा भेजा। पार्टी के अंदर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि कहीं इस बार दोबारा सिंघवी तो प्रत्याशी बनकर नहीं आएंगे। सिंघवी वरिष्ठ अधिवक्ता भी है और पार्टी को उनकी जरूरत कानूनी मामलों में भी पड़ती है। ऐसे में यह चर्चा भी एक बार फिर से जोर पकड़ने लगी हुई है।
आनंद और प्रतिभा के साथ शांडिल का नाम भी चर्चा में
संगठन सूत्रों की मानें तो पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा का नाम भी राज्यसभा प्रत्याशी के लिए चर्चा में है। वह मनमोहन सिंह सरकार में विदेश व वाणिज्य मंत्रालय संभाल चुके हैं। विदेश मामलों पर उनकी अच्छी पकड़ है। हाल ही के दिनों में कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठकों में आनंद शर्मा को विशेष तौर पर बुलाया गया है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल का नाम भी लिया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो सरकार को एक बार फिर उपचुनाव से गुजरना होगा। वहीं कांग्रेस पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का नाम भी चर्चा में है। एक धड़ा उनकी पैरवी भी प्रत्याशी के लिए कर रहा है।
कांग्रेस के लिए चुनाव जीतना आसान
यदि कोई विरोध नहीं हुआ तो कांग्रेस के लिए चुनाव जीतना आसान होगा। 2024 में जब राज्यसभा सीट के लिए चुनाव हुआ था तो कांग्रेस की 40 सीटें थी, भाजपा की 25 सीटें थी और 3 निर्दलीय विधायक थे। इस बार कांग्रेस के पास 40 सीटें है और भाजपा की सीटें 28 हैं। पिछली बार कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रास वोट किया था और निर्दलीय का समर्थन मिला था। इस बार कोई भी निर्दलीय नहीं है। बावजूद इसके कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम रखेगी।