HERC Puts Brakes on 340

340 मेगावाट जलविद्युत खरीद योजना पर HERC की रोक, उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ की आशंका

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HERC Puts Brakes on 340

चंडीगढ़। हरियाणा में भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रस्तावित 340 मेगावाट जलविद्युत खरीद योजना को बड़ा झटका लगा है। Haryana Electricity Regulatory Commission ने इस प्रस्ताव पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि हरित ऊर्जा के नाम पर ऐसा कोई भी दीर्घकालिक समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिससे आने वाले वर्षों में बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका हो।

यह प्रस्ताव Haryana Power Purchase Centre द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसके तहत अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सात जलविद्युत परियोजनाओं से 340 मेगावाट बिजली 40 वर्षों की अवधि के लिए खरीदने की योजना थी। सरकार का तर्क था कि भविष्य में बढ़ती बिजली मांग और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए स्थायी बिजली स्रोत सुनिश्चित करना आवश्यक है।

हालांकि, आयोग ने अपने आदेश में कहा कि इतनी लंबी अवधि के लिए किया जाने वाला समझौता मौजूदा परिस्थितियों में जोखिम भरा साबित हो सकता है। आयोग ने विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाओं में निर्माण में देरी और लागत बढ़ने की संभावनाओं पर चिंता जताई। पहाड़ी क्षेत्रों में भूगर्भीय चुनौतियों के कारण परियोजनाओं की लागत अक्सर अनुमान से अधिक बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर बिजली खरीद लागत पर पड़ता है।

आयोग ने चेतावनी दी कि यदि परियोजनाओं की लागत बढ़ती है तो इसका भार अंततः बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और उनके बिजली बिलों में वृद्धि हो सकती है। इसी संभावना को आयोग ने "टैरिफ शॉक" करार देते हुए उपभोक्ता हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि HERC का यह फैसला केवल एक बिजली खरीद प्रस्ताव को अस्वीकार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं को भविष्य में संभावित महंगी बिजली से बचाने और बिजली दरों को नियंत्रित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।