हरियाणा में शुरू होगी ‘जल स्वास्थ्य कार्ड’ योजना, ट्यूबवेल पानी की होगी वैज्ञानिक जांच
- By Gaurav --
- Tuesday, 12 May, 2026
Haryana to Launch ‘Water
Haryana सरकार किसानों के लिए खेती को अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मिट्टी की जांच के बाद अब प्रदेश में ट्यूबवेल के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए ‘जल स्वास्थ्य कार्ड’ योजना शुरू की जाएगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अगले तीन वर्षों में राज्य के करीब 8 लाख ट्यूबवेलों के पानी का डेटा एकत्र किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 2 प्रतिशत यानी करीब 5 लाख टन की वृद्धि करना है।
योजना के तहत किसानों को वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर यह सलाह दी जाएगी कि उनकी जमीन और पानी की गुणवत्ता के अनुसार कौन सी फसल सबसे उपयुक्त रहेगी।
इस परियोजना की खास बात इसका हाई-टेक सिस्टम है। ट्यूबवेल से लिए गए पानी के सैंपल को GPS लोकेशन से जोड़ा जाएगा, ताकि डेटा में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके। वैज्ञानिक पानी की जांच 9 अलग-अलग मानकों पर करेंगे, जिनमें पीएच वैल्यू, क्षारीयता, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फेट जैसे तत्व शामिल होंगे।
जांच पूरी होने के बाद ‘जल स्वास्थ्य कार्ड’ किसानों के मोबाइल फोन पर भेजा जाएगा। इस कार्ड में पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट के साथ बोरिंग की गहराई और भू-जल स्तर की जानकारी भी दर्ज होगी।
प्रदेश में लगभग 60 प्रतिशत खेती ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर है। हालांकि हाल के वर्षों में पानी में बढ़ते भारी लवण (Heavy Salt) के कारण जमीन की उर्वरा शक्ति प्रभावित हुई है।
इस समस्या से निपटने के लिए Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University और Central Soil Salinity Research Institute के वैज्ञानिकों की एक विशेष समिति गठित की गई है।
यह समिति किसानों को बताएगी कि यदि पानी की गुणवत्ता खराब है, तो जिप्सम और अन्य पोषक तत्वों के इस्तेमाल से उसे खेती योग्य कैसे बनाया जा सकता है। इससे खाद और बीज की बर्बादी कम होगी और खेती की लागत में भी कमी आएगी।