हरियाणा में नया सोशल सिक्योरिटी कोड ड्राफ्ट जारी, ग्रेच्युटी से लेकर रिकॉर्ड तक सब होगा डिजिटल
Haryana releases draft of new Social Security Code
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने श्रमिकों और कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न कानूनों को एकीकृत करते हुए 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (हरियाणा) रूल्स 2026' का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। नये नियमों में कर्मचारियों के ग्रेच्युटी भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने का प्रस्ताव है। कर्मचारी, नामित व्यक्ति या कानूनी वारिस ऑनलाइन या स्पीड पोस्ट से आवेदन कर सकेंगे।
फिक्स्ड टर्म (निश्चित अवधि) के रोजगार वाले कर्मचारी भी कम से कम एक वर्ष की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी के पात्र होंगे। वहीं, छह महीने से अधिक की अतिरिक्त सेवा को एक अतिरिक्त वर्ष माना जाएगा। निश्चित अवधि के रोजगार वाले कर्मचारी वे व्यक्ति होते हैं, जिन्हें एक पूर्व निर्धारित समाप्ति तिथि वाले अनुबंध के तहत नियुक्त किया जाता है या जिनका अनुबंध किसी विशिष्ट परियोजना के पूर्ण होने पर समाप्त हो जाता है।
हरियाणा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मेडिकल खर्च प्रतिपूर्ति, स्टाक आप्शन, क्रेच अलाउंस, इंटरनेट-टेलीफोन रिइंबर्समेंट और मील वाउचर को वेतन का हिस्सा नहीं माना जाएगा। कर्मचारी को ग्रेच्युटी के लिए उस तारीख से 30 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा जब वह देय हो जाती है।
श्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सरकार ने सभी पक्षों से 45 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी-2020' को लागू किए जाने के बाद उठाया गया है। केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 की अधिसूचना के जरिये सोशल सिक्योरिटी कोड के प्रविधान लागू कर दिए थे, जिसके बाद हरियाणा सरकार ने राज्य स्तर पर नये नियमों का मसौदा जारी किया है। नये नियम लागू होने के बाद हरियाणा में श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई पुराने नियम समाप्त हो जाएंगे।
इनमें हरियाणा मैटरनिटी बेनिफिट रूल्स 1967, हरियाणा पेमेंट आफ ग्रेच्युटी रूल्स 1972, हरियाणा अनआर्गेनाइज्ड वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी रूल्स 2010, पंजाब एंप्लाइज इंश्योरेंस कोर्ट रूल्स 1951, रोजगार रिक्तियों की अनिवार्य सूचना नियम 1960 तथा भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड नियम 2005 शामिल हैं।
औद्योगिक प्रतिष्ठानों का पंजीकरण श्रम विभाग के पोर्टल पर: ड्राफ्ट नियमों के अनुसार सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों और संस्थानों का पंजीकरण अब श्रम विभाग के निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन होगा। आवेदन पूरा होने पर सात दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करना होगा अन्यथा इसे स्वत: स्वीकृत माना जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई प्रतिष्ठान 24 महीने तक पोर्टल पर कोई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं करता तो उसका रजिस्ट्रेशन समाप्त माना जाएगा। गलत जानकारी देकर रजिस्ट्रेशन लेने पर रद भी किया जा सकेगा।
- सोशल सिक्योरिटी कोड-2026 लागू करने की तैयारी।
- सरकार ने 45 दिन में मांगे सुझाव, कई पुराने श्रम कानूनों के नियम खत्म होंगे।
- मेडिकल खर्च प्रतिपूर्ति, क्रेच अलाउंस, इंटरनेट-टेलीफोन रिइंबर्समेंट और मील वाउचर वेतन का हिस्सा नहीं।
मातृत्व लाभ के मामलों की अपील अब डीएलसी के पास
मातृत्व लाभ से जुड़े मामलों में इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर के आदेशों के खिलाफ अपील अब संबंधित डिप्टी लेबर कमिश्नर के पास की जा सकेगी। ड्राफ्ट नियमों में कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में अंतिम संस्कार खर्च के रूप में न्यूनतम 20 हजार रुपये जमा करवाने का प्रविधान किया गया है। राज्य सरकार भविष्य में इस राशि को बढ़ा भी सकेगी।
सरकार ने आम लोगों और संगठनों से सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित की हैं। ये सुझाव लेबर कमिश्नर हरियाणा के पास भेजे जा सकते हैं। [email protected] पर ई-मेल के जरिए भी सुझाव दिए जा सकेंगे।
सोशल सिक्योरिटी कोड के अन्य प्रविधान
- नियोक्ताओं को अपने संस्थान में रिक्तियों की जानकारी आवेदन प्राप्त करने या इंटरव्यू की तारीख से कम से कम 15 दिन पहले पोर्टल पर देनी होगी।
- चयन प्रक्रिया पूरी होने के एक महीने के भीतर नियोक्ता को परिणामों की जानकारी भी पोर्टल पर साझा करनी होगी।
- नियोक्ताओं को सभी रजिस्टर (हाजिरी, वेतन, ओवरटाइम और कटौती) हिंदी या अंग्रेजी में इलेक्ट्रानिक रूप से रखने होंगे।
- इन सभी रिकार्ड्स को अंतिम इंट्री की तारीख से कम से कम पांच कैलेंडर वर्षों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
- नियोक्ताओं को 'फार्म 20' में महिला कर्मचारियों का एक विस्तृत रजिस्टर बनाना होगा। इसमें उनकी नियुक्ति,
- कार्य की प्रकृति, गर्भावस्था की सूचना, मातृत्व लाभ का भुगतान और चिकित्सा अवकाश जैसे विवरण दर्ज किए जाएंगे।