हरियाणा विधानसभा का मीडिया समन्वय मॉडल कर्नाटक में सराहा गया: चंद्र शेखर धरणी
- By Gaurav --
- Sunday, 29 Mar, 2026
Haryana Assembly’s Media Coordination
कर्नाटक और तमिलनाडु के अध्ययन दौरे पर पहुंचे Chandra Shekhar Dharni ने U. T. Khader से मुलाकात के दौरान हरियाणा विधानसभा में मीडिया और सदन के बीच बेहतर समन्वय की कार्यप्रणाली साझा की। इस दौरान उन्होंने कर्नाटक में भी हरियाणा की तर्ज पर प्रेस एडवाइजरी कमेटी (PAC) गठित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
धरणी ने बताया कि Harvinder Kalyan के नेतृत्व में हरियाणा विधानसभा में मीडिया और सदन के बीच स्वस्थ, सकारात्मक और प्रभावी संवाद बनाए रखने के लिए प्रेस एडवाइजरी कमेटी लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में यह कमेटी केवल औपचारिक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक सक्रिय मंच है, जो विशेष रूप से विधानसभा सत्रों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बैठक के दौरान यह जानकारी सामने आई कि कर्नाटक विधानसभा में अब तक प्रेस एडवाइजरी कमेटी का गठन नहीं हुआ है और फिलहाल लोक संपर्क विभाग ही मीडिया समन्वय से जुड़ी जिम्मेदारियां निभा रहा है। इस पर धरणी ने हरियाणा मॉडल को एक संस्थागत और दीर्घकालिक व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि विधानसभा, जनप्रतिनिधियों और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय हो तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सकती है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में मीडिया को केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ माना जाता है। धरणी ने बताया कि स्पीकर हरविंदर कल्याण मीडिया हितैषी हैं और पत्रकारों की भूमिका को गंभीरता से समझते हैं, जिसके चलते हरियाणा विधानसभा में पत्रकारों और सदन के बीच संवाद की संस्कृति मजबूत हुई है।
धरणी ने यह भी कहा कि Nayab Singh Saini भी मीडिया के साथ सकारात्मक संवाद बनाए रखने के पक्षधर हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री Manohar Lal Khattar ने अपने कार्यकाल में सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए पेंशन योजना शुरू की थी, जिसे पत्रकारों के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में हरियाणा में सेवानिवृत्त पत्रकारों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है, जो पत्रकारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
धरणी ने विश्वास जताया कि ऐसे अध्ययन दौरों से विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के बीच बेहतर व्यवस्थाओं और सफल मॉडलों के आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और मजबूत होगी।