हमीरपुर के लाल का आसमान में ऊंचा कद: भूपेंद्र सिंह कंवर बने एयर वाइस मार्शल; सैनिक स्कूल सुजानपुर के नाम एक और रिकॉर्ड
Hamirpur's son achieves great stature: Bhupendra Singh Kanwar
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के छोटे से गांव ढोह से निकलकर भारतीय वायुसेना में उच्च पद तक पहुंचने वाले एयर कमोडोर भूपेंद्र सिंह कंवर को एयर वाइस मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है और इसे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का क्षण माना जा रहा है।
एयर वाइस मार्शल भूपेंद्र सिंह कंवर ने 13 अप्रैल को असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (पर्सनल एंड सिविलियन्स) का कार्यभार संभाला। करीब 34 वर्षों की शानदार सेवा के बाद उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सैनिक स्कूल सुजानपुर के पूर्व विद्यार्थी
वह सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा से एयर कमोडोर बनने वाले पहले अधिकारी रहे हैं और अब एयर वाइस मार्शल बनने वाले भी पहले ही हैं। ढोह गांव में जन्मे कंवर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कंजियांण और ऊना में पूरी की।
वर्ष 1981 में उन्होंने सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा में प्रवेश लिया और 1987 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 78वें कोर्स में शामिल हुए। दिसंबर 1991 में उन्हें भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग नेविगेशन शाखा में कमीशन मिला।
4000 से अधिक उड़ान घंटे पूरे किए
उन्होंने एचएस-748 एव्रो, एएन-32 और आईएल-76 जैसे विमानों पर 4000 से अधिक उड़ान घंटे पूरे किए हैं। अपने करियर में उन्होंने क्वालिफाइड नेविगेशन इंस्ट्रक्टर के रूप में पहचान बनाई और एयरक्रू एग्जामिनिंग बोर्ड में देश के सबसे युवा परीक्षकों में शामिल रहे। इसके अलावा उन्होंने चीफ नेविगेशन इंस्ट्रक्टर, नेविगेशन ट्रेनिंग स्कूल के कमांडिंग ऑफिसर और एक ऑपरेशनल एयर डिफेंस बेस के प्रमुख के रूप में अहम जिम्मेदारियां निभाईं।
95 हजार कैडेट्स को प्रशिक्षण दिया
उन्होंने एनसीसी में उप महानिदेशक के रूप में कर्नाटक और गोवा के लगभग 95 हजार कैडेट्स को प्रशिक्षण दिया और एयर फोर्स रिकॉर्ड्स ऑफिस का नेतृत्व करते हुए मानव संसाधन प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पा चुके हैं विशिष्ट सेवा पदक
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें एओसी-इन-सी प्रशंसा, चीफ ऑफ एयर स्टाफ प्रशंसा और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा है और यह दर्शाती है कि मेहनत और समर्पण से किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है।