शिमला नगर निगम में शोक: लेखा अधिकारी रामेश्वर शर्मा आत्महत्या मामले में सुसाइड नोट बरामद
Grief at Shimla Municipal Corporation
शिमला। Grief at Shimla Municipal Corporation, नगर निगम शिमला में कार्यरत लेखा अधिकारी रामेश्वर शर्मा आत्महत्या मामले में पुलिस को देर रात घर की दोबारा तलाशी के दौरान सुसाइड नोट मिला है। इसमें उन्होंने मानसिक तनाव का जिक्र किया है। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति या अधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। पुलिस ने सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
रामेश्वर शर्मा के साले कृष्ण शर्मा ने आरोप लगाया कि उनका भानजा भी कार्यालय में किसी तरह की लाबिंग की बात कर रहा था और सुसाइड नोट में भी ऐसी बातें लिखी हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।
शुक्रवार को पुलिस कंट्रोल रूम 112 के माध्यम से थाना शिमला पूर्वी को सूचना मिली कि एक व्यक्ति को उपचार के लिए आइजीएमसी शिमला लाया गया और चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 45 वर्षीय रामेश्वर शर्मा पुत्र तुलसी राम गांव सीमा डाकघर रत्नाड़ी तहसील रोहड़ू जिला शिमला का रहने वाला था। वह मेहली स्थित पाइन व्यू बिल्डिंग गुसां रोड में रहता था।
ऑफिस से जल्दी आकर किया सुसाइड
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रामेश्वर शुक्रवार को कार्यालय गया था, लेकिन तय समय से पहले घर लौट गया। पत्नी ने उसे घर में फंदे से लटका पाया था। पुलिस ने शनिवार को आइजीएमसी में शव का पोस्टमार्टम करवाया और आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। सहकर्मियों के अनुसार, रामेश्वर शांत स्वभाव और जिम्मेदारी से काम करता था।
पुलिस को रामेश्वर के घर से देर रात सुसाइड नोट मिला है। इसमें उसने मानसिक तनाव की बात लिखी है, लेकिन किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
-गौरव सिंह, एसपी शिमला।
फंदा लगाने से पहले फोन पर पत्नी से की थी बात
रामेश्वर शर्मा ने आत्महत्या से पहले पत्नी से फोन पर बात की थी, जो रिश्तेदार की शादी में रोहड़ू गई थी। रामेश्वर ने पत्नी को फोन कर पूछा था कि वे कहां पहुंचे हैं। पत्नी ने बताया कि वे संजौली पहुंच गए हैं। इसके कुछ मिनट बाद रामेश्वर ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। करीब आधे घंटे बाद पत्नी व बेटा घर पहुंचे। पत्नी ने अपनी चाबी से दरवाजा खोला और कमरे में पहुंची तो उसके होश उड़ गए। उसने चीखते हुए बेटे को बुलाया, जिसके बाद दोनों ने रामेश्वर को फंदे से नीचे उतारा। इसके बाद घटना की सूचना 112 हेल्पलाइन पर दी।
वाहन को लेकर जेई से हुआ था विवाद
रामेश्वर की आत्महत्या के मामले में अब उनके कार्यालय से जुड़े घटनाक्रम भी सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले कार्यालय में आवंटित टैक्सी को लेकर रामेश्वर का जूनियर इंजीनियर के साथ विवाद हुआ था। नगर निगम के संयुक्त आयुक्त स्तर पर इसे सुलझा लिया था। रामेश्वर शर्मा ने दफ्तर में हो रही लाबिंग को लेकर बच्चे और पारिवारिक सदस्यों से चर्चा की थी। नगर निगम आयुक्त ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया है।
क्या बोले नगर निगम आयुक्त
आयुक्त ने कहा कि रामेश्वर शर्मा पूरी तरह प्रोफेशनल अधिकारी थे। उनकी कार्य क्षमता तथा अनुशासन के मामले में उनकी अलग पहचान थी। उन्होंने कहा कि वह कभी भी कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालते थे। यहां तक कि काम चार गुना अधिक होने पर भी वह संयम और व्यवस्थित तरीके से कार्य करवाने में विश्वास रखते थे। नगर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुसार, रामेश्वर शर्मा शांत स्वभाव और जिम्मेदार अधिकारी माने जाते थे। उनके अचानक इस तरह चले जाने से नगर निगम परिवार में शोक का माहौल है।
आइजीएमसी में पोस्टमार्टम के समय मौजूद रहे मेयर व आयुक्त
नगर निगम शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान व आयुक्त भुपेंद्र अत्री शनिवार को सुबह ही पोस्टमाटर्म से पहले दोनों ही पहुंच गए। इस दौरान दोनों ने स्वजनों से मुलाकात की। स्वजनों न जब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई हैं, अधिकारियों व मेयर ने उन्हें निष्पक्ष जांच की मांग की है।