गोरखपुर: बिजली दरों में बदलाव से उद्योग जगत में असंतोष, मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा
Gorakhpur: Industry dissatisfied with the change in
गोरखपुर। औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की दरों में हुए हालिया बदलाव को लेकर उद्योग जगत में असंतोष बढ़ता जा रहा है। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज ने मुख्यमंंत्री को संबोधित ज्ञापन गोरखपुर स्थित कैंप कार्यालय में दिया। ज्ञापन में कहा गया कि ईंधन एवं विद्युत अधिभार फ्यूल सरचार्ज के रूप में हर महीने अलग-अलग राशि जोड़ी जा रही है, जो जनवरी माह में बिजली बिल का लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच गई।
यह अतिरिक्त भार ऐसे समय में लगाया जा रहा है, जब स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। चेंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा ईंधन एवं बिजली अधिभार (सरचार्ज) के रूप में हर महीने अलग-अलग राशि वसूली जा रही है। जनवरी माह में यह अधिभार कुल बिजली बिल का 10 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में टिके रहने के लिए लागत कम करना अनिवार्य है, लेकिन बिजली बिलों में जुड़ रहा यह ‘अतिरिक्त भार’ उद्योगों की कमर तोड़ रहा है। ज्ञापन के माध्यम से यह मुद्दा भी उठाया गया है कि नए उद्योगों के लिए बिजली कनेक्शन लेना अब बेहद महंगा सौदा हो गया है।
कनेक्शन लागत और प्रतिभूति (सिक्योरिटी) राशि में अचानक हुई भारी वृद्धि ने नए निवेशकों के सामने वित्तीय संकट खड़ा कर दिया है। इससे उद्यमियों की कार्यशील पूंजी का बड़ा हिस्सा केवल बिजली औपचारिकता में फंस रहा है, जो नए स्टार्टअप और इकाइयों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है।
मुख्यमंत्री से सूक्ष्म एवं लघु उद्योग नीति-2022 का हवाला देते हुए उद्यमियों ने मांग की है कि नई इकाइयों को ‘इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी’ (विद्युत कर) में छूट दी जाए। वर्तमान में इस नीति में छूट का प्रावधान न होने से उन उद्यमियों पर दबाव बढ़ गया है, जो पहले से ही बैंक ब्याज और टर्म लोन के किश्तों के बोझ तले दबे हैं। उद्यमियों ने मुख्यमंत्री से इन समस्याओं के सहानुभूतिपूर्ण समाधान की अपील की है ताकि गोरखपुर और पूर्वांचल का औद्योगिक इंजन बिना किसी बाधा के दौड़ता रहे।