Gorakhpur में बनेगा Forestry & Horticulture University: योगी कैबिनेट ने अध्यादेश को दी मंजूरी

Gorakhpur में बनेगा Forestry & Horticulture University: योगी कैबिनेट ने अध्यादेश को दी मंजूरी

Forestry & Horticulture University

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लखनऊ। Forestry & Horticulture University, प्रदेश में हरित विकास, वन संरक्षण और आधुनिक बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने एक और कदम बढ़ाते हुए गोरखपुर में वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए अध्यादेश को स्वीकृति दे दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ''उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026'' को हरी झंडी मिल गई है। यह विश्वविद्यालय गोरखपुर के कैंपियरगंज में करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित किया जा रहा है। इस पहल से प्रदेश में वनावरण और वृक्षावरण बढ़ाने के साथ-साथ वन्य जीव संरक्षण और औद्यानिकी क्षेत्र में नई तकनीक को बढ़ावा मिलेगा। विश्वविद्यालय निर्माण के लिए 491 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली है।

पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने बताया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय में वानिकी और औद्यानिकी से जुड़े आधुनिक विषयों की पढ़ाई और शोध की व्यवस्था होगी। इसमें सिल्वीकल्चर, एग्रोफारेस्ट्री, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, वन्यजीव संरक्षण, फल एवं बागवानी विज्ञान, पुष्प कृषि और पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलाजी जैसे विषय शामिल होंगे। यहां बीएससी, एमएससी और पीएचडी के साथ अल्पकालिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।


यूं तो विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय कैबिनेट ने 22 दिसंबर 2025 को ही कर लिया था किंतु अध्यादेश आने के बाद अब यह विश्वविद्यालय मूर्त रूप ले सकेगा। सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट में इस परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था भी कर रखी है, इससे निर्माण कार्य भी तेज हो सकेगा।

विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही किसानों और छात्रों की क्षमता वृद्धि, खाद्य सुरक्षा को हरित आवरण से जोड़ना, विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना और प्रयोगशाला से खेत तक अनुसंधान को पहुंचाना है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में न केवल पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा, बल्कि युवाओं को रोजगार और शोध के नए अवसर भी मिलेंगे। साथ ही जैव विविधता संरक्षण और टिकाऊ विकास को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।