Dushyant Chautala Slams Haryana State Cooperative

जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने सूरजमुखी के रेट घटाने पर उठाए सवाल, हैफेड के फैसले को बताया किसान विरोधी

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Dushyant Chautala Slams Haryana State Cooperative

: हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री Dushyant Chautala ने आगामी सूरजमुखी की फसल की खरीद को लेकर राज्य की खरीद एजेंसी Haryana State Cooperative Supply and Marketing Federation (HAFED) द्वारा घोषित दरों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला हरियाणा के किसानों के साथ सीधा धोखा है और इससे किसानों को भारी नुकसान होगा।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि भाजपा सरकार के शासन में खरीद एजेंसियां किसानों की कमर तोड़ने पर तुली हुई हैं, जबकि राज्य सरकार मूकदर्शक बनकर उनका समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और बेमौसमी बारिश के कारण किसान पहले ही परेशान हैं, ऐसे में सरकार को फसलों पर बोनस देना चाहिए, न कि समर्थन मूल्य में कटौती करनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि जून 2025 में केंद्र सरकार के Ministry of Agriculture and Farmers Welfare ने वर्ष 2025-26 के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की थी। उस समय सूरजमुखी के लिए 7721 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य तय किया गया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 441 रुपये अधिक था। सरकार ने दावा किया था कि इससे किसानों को उनकी लागत से 50 प्रतिशत अधिक मूल्य मिलेगा।

लेकिन दुष्यंत चौटाला के अनुसार सूरजमुखी की फसल पकने से पहले ही किसानों की उम्मीदों को झटका लग गया है। उन्होंने कहा कि हैफेड ने अब सूरजमुखी की फसल की खरीद 6540 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने का फैसला किया है। यह दर पिछले वर्ष के न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब 740 रुपये कम है और किसानों के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है।

उन्होंने हैरानी जताई कि पिछले वर्षों में सूरजमुखी किसानों द्वारा कई बार आंदोलन किए जाने के बावजूद खरीद एजेंसी इस तरह मनमाने और अनुचित दाम घोषित कर रही है। उनके अनुसार यह फैसला किसानों को उकसाने और उन्हें टकराव की स्थिति में धकेलने की कोशिश है।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जिस तरह महंगाई बढ़ रही है और बेमौसमी बारिश किसानों पर कहर बरपा रही है, उसे देखते हुए राज्य सरकार को फसलों की खरीद पर बोनस देना चाहिए। लेकिन इसके विपरीत सरकार समर्थन मूल्य से भी कम दर पर खरीद की अनुमति देकर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है।

उन्होंने मांग की कि हरियाणा सरकार इस किसान विरोधी फैसले का कारण स्पष्ट करे और इसे तुरंत वापस ले, ताकि किसानों को राहत मिल सके।