“खाकी में संवेदनशीलता: बुजुर्ग की मदद कर चर्चा में आईं DSP रुचि गुप्ता”

“खाकी में संवेदनशीलता: बुजुर्ग की मदद कर चर्चा में आईं DSP रुचि गुप्ता”

DSP Ruchi Gupta came into the limelight after helping an elderly man

DSP Ruchi Gupta came into the limelight after helping an elderly man

सहारनपुर: DSP Ruchi Gupta came into the limelight after helping an elderly man, उत्तर प्रदेश पुलिस में कई ऐसे अधिकारी हैं, जो कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के साथ-साथ अपनी मानवीय संवेदनाओं के कारण भी लोगों के दिलों में अलग पहचान बनाते हैं। सहारनपुर में तैनात DSP (क्षेत्राधिकारी) रुचि गुप्ता भी ऐसी ही एक अधिकारी हैं। अपराध और कानून व्यवस्था पर उनकी सख्त पकड़ के साथ-साथ आम लोगों के प्रति उनका संवेदनशील रवैया उन्हें लगातार चर्चा में बनाए रखता है।

लखनऊ से शुरू हुआ सफर

रुचि गुप्ता का जन्म 8 अप्रैल 1981 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ। उनके पिता का नाम राजेंद्र कुमार गुप्ता है, जो एक बिजनेसमैन हैं। परिवार से मिले संस्कार के कारण बचपन से ही उनके अंदर अनुशासन और समाज के लिए कुछ करने की भावना थी। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि वे प्रशासनिक या पुलिस सेवा में जाकर समाज के लिए काम करेंगी। इसी लक्ष्य को सामने रखकर उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की और आखिरकार उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में चयनित होकर अपने सपने को साकार किया।

PPS सेवा में चयन और पुलिस करियर

रुचि गुप्ता का चयन PPS 2015 बैच में हुआ। 29 अगस्त 2016 को उनकी भर्ती हुई और 28 अगस्त 2018 को उन्हें स्थायी रूप से सेवा में पोस्टिंग मिली। प्रशिक्षण के दौरान ही उनकी कार्यशैली ने वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान खींचा। कानून व्यवस्था संभालने, अपराध नियंत्रण और जनता से संवाद स्थापित करने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक प्रभावी पुलिस अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई। अपने शुरुआती कार्यकाल में उन्होंने जिन जिलों में जिम्मेदारी संभाली, वहां उन्होंने सक्रिय पुलिसिंग और अनुशासित कार्यप्रणाली से अलग छाप छोड़ी।

मां के निधन के बाद टूटे हौसले को पिता ने दिया सहारा

रुचि गुप्ता के जीवन में एक कठिन दौर तब आया, जब वे ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थीं। उसी दौरान उनकी मां का निधन हो गया। इस घटना ने उन्हें भीतर से झकझोर दिया था और उनका मनोबल टूटने लगा था, लेकिन उनके पिता ने खुद के दर्द को छिपाकर उन्हें संभाला और जीवन के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एनबीटी ऑनलाइन से हुई बातचीत में बताया कि उस मुश्किल समय में पिता और भाइयों का साथ ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। उसी हौसले ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और अंततः वे पुलिस सेवा तक पहुंचीं।

लेक्चरर से पुलिस अधिकारी तक का सफर

पुलिस सेवा में आने से पहले रुचि गुप्ता झांसी के एक कॉलेज में लेक्चरर के रूप में कार्यरत थीं। इसी दौरान उनका चयन कस्टम विभाग में भी हुआ था, लेकिन बाद में उनका चयन PPS में हो गया। उन्होंने पुलिस सेवा को चुनना ही बेहतर समझा, क्योंकि इसमें उन्हें समाज के लिए सीधे काम करने का अवसर दिखाई दिया। खाकी की जिम्मेदारी ने उन्हें समाज सेवा का व्यापक मंच दिया।

होली का इंतजार और गुझिया से जुड़ी बचपन की यादें

रुचि गुप्ता बताती हैं कि उन्हें होली का त्योहार बचपन से बेहद पसंद है। रंगों के इस त्योहार के साथ-साथ अलग-अलग पकवान के साथ उन्हें खासतौर पर मावे और मेवे से भरी गुझिया बहुत पसंद है। उनका कहना है कि पुलिस की जिम्मेदारियों के बीच भी त्योहार लोगों को जोड़ने का अवसर देते हैं। वे अपने स्टाफ को परिवार की तरह मानती हैं और त्योहारों पर उनके साथ मिठाइयां बांटकर उत्सव मनाना पसंद करती हैं। उनका मानना है कि इससे पुलिस टीम का मनोबल भी बढ़ता है और आपसी विश्वास मजबूत होता है।

सहारनपुर में जिम्मेदारी और सक्रिय पुलिसिंग

31 मार्च 2023 को रुचि गुप्ता को सहारनपुर जिले के नकुड़ सर्किल में DSP (CO) के रूप में तैनाती मिली। उनके कार्यभार संभालने के बाद क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता बढ़ी और कानून व्यवस्था को लेकर सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पास जो भी अपनी समस्या लेकर जाता है, वह संतुष्ट होकर लौटता है। वे शिकायतों को गंभीरता से सुनती हैं और समाधान की कोशिश करती हैं।

त्योहारों में शांति बनाए रखने की पहल

फरवरी और मार्च 2026 में होली और जुमे की नमाज जैसे बड़े अवसर एक साथ आए, जिससे जिले में सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती बन गई थी। ऐसे समय में रुचि गुप्ता ने संवेदनशील इलाकों में पुलिस टीम के साथ पैदल गश्त की। उन्होंने लोगों से सीधे संवाद कर शांति और भाईचारे का संदेश दिया और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी। इस दौरान उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें वे पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें मिठाई बांटती नजर आईं।

बुजुर्ग की मदद के बदले मिला आशीर्वाद

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें रुचि गुप्ता सड़क किनारे खड़े एक बुजुर्ग की कार पंक्चर होने पर उनकी कार की स्टेपनी बदलवाने में मदद करती दिखाई दीं। इस घटना ने लोगों के बीच उनकी छवि को और मजबूत कर दिया। इस मामले पर उन्होंने कहा कि बुजुर्ग समाज की जड़ हैं और उनकी मदद करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। उनके अनुसार, पुलिस सिर्फ कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि जरूरत के समय जनता की मददगार भी है।

महिला सुरक्षा पर विशेष फोकस

रुचि गुप्ता महिलाओं और छात्राओं के बीच जागरूकता कार्यक्रमों में भी सक्रिय रहती हैं। वे स्कूल और कॉलेजों में जाकर महिला सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव और पुलिस सेवाओं की जानकारी से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। उनका मानना है कि अपराध को रोकने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता भी जरूरी है।