उत्तराखंड में विकास की 'डबल इंजन' रफ्तार: CM धामी ने ₹53.56 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी; डिजिटल फोरेंसिक लैब और सिटी मोबिलिटी पर जोर

उत्तराखंड में विकास की 'डबल इंजन' रफ्तार: CM धामी ने ₹53.56 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी; डिजिटल फोरेंसिक लैब और सिटी मोबिलिटी पर जोर

Double Engine Pace of Development in Uttarakhand

Double Engine' Pace of Development in Uttarakhand

देहरादून। Double Engine' Pace of Development in Uttarakhand, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में विकास कार्यों को गति देने के लिए 53.56 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। यह स्वीकृति नगरीय अवस्थापना, सड़क विकास, विद्युत आपूर्ति, आपदा राहत, डिजिटल फोरेंसिक लैब व सामाजिक-सांस्कृतिक निर्माण कार्यों के लिए दी गई है।

राज्य योजना के तहत देहरादून में सिटी मोबिलिटी प्लान के छह कार्यों के लिए 33.45 करोड़ मंजूर किए गए हैं, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था और शहरी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

वहीं, राज्य कर विभाग में डिजिटल फोरेंसिक लैब की स्थापना नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए पांच वर्ष की अवधि हेतु 11.27 करोड़ की स्वीकृति दी गई है, जिससे आर्थिक अपराधों की जांच क्षमता को सशक्त किया जा सकेगा।

चमोली में वर्ष 2025-26 के मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए राहत भी मंजूर की गई है। पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त 85 आवासों और 17 मृतकों के आश्रितों को सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से दो करोड़ की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई ह

हरिद्वार जनपद के झबरेड़ा क्षेत्र के ग्राम सालियर में हाईवे के पास डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना के लिए 37.12 लाख स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा चंपावत जनपद में 74 छूटे तोकों तक विद्युत आपूर्ति के लिए पांच करोड़ और ग्राम हौली पिपलाटी से ज्योसुड़ा तक सीसी रोड निर्माण के लिए 60.20 लाख मंजूर किए गए हैं।

अल्मोड़ा के सोमेश्वर क्षेत्र में 200 बिजली के पोल लगाने के लिए 46.01 लाख तथा सल्ट क्षेत्र में पूर्व विधायक स्वर्गीय सुरेंद्र सिंह जीना की स्मृति में द्वार निर्माण के लिए 41.07 लाख स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धन शोधन मामले में आरोपित सेवानिवृत्त वन अधिकारी किशन चंद के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति भी प्रदान की है। यह कार्यवाही धन संशोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत की जा रही है।