Disabled Armed Forces Personnel

15 साल की सेवा जरूरी नहीं, डिसेबिलिटी पर रिटायर सैनिकों को मिलेगी पेंशन: हाईकोर्ट

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Disabled Armed Forces Personnel

Punjab and Haryana High Court ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि सैन्य सेवा के दौरान हुई विकलांगता (डिसेबिलिटी) के आधार पर रिटायर हुए आर्म्ड फोर्सेज कर्मियों को डिसेबिलिटी पेंशन का अधिकार है, भले ही उन्होंने 15 वर्ष की न्यूनतम सेवा अवधि पूरी न की हो।

यह फैसला जस्टिस Harsimran Singh Sethi और जस्टिस Deepak Manchanda की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें Armed Forces Tribunal (AFT) के आदेश को चुनौती दी गई थी।

AFT ने मार्च 2022 में केंद्र सरकार को लगभग 9 वर्ष सेवा कर चुके पूर्व सैनिक को डिसेबिलिटी पेंशन देने का निर्देश दिया था। केंद्र सरकार का तर्क था कि संबंधित कर्मचारी ने 15 साल की अनिवार्य सेवा पूरी नहीं की थी, इसलिए वह पेंशन का हकदार नहीं है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि किसी अधिकारी को सेवा के दौरान हुई विकलांगता के कारण समय से पहले रिटायर किया जाता है, तो केवल सेवा अवधि के आधार पर उसे पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।

मामले में मेडिकल बोर्ड ने यह माना था कि संबंधित अधिकारी की बीमारी सैन्य सेवा के कारण बढ़ी थी और उसकी 30 प्रतिशत स्थायी विकलांगता निर्धारित की गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर कानून पहले ही स्पष्ट हो चुका है। अदालत ने Union of India vs V.R. Nanakutty Nair मामले में Supreme Court of India के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विकलांगता के आधार पर रिटायर कर्मियों को पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।

खंडपीठ ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि स्थापित कानूनी सिद्धांतों के बावजूद इस प्रकार की याचिका दायर करना उचित नहीं है।