शिमला: पुराने बॉस को 'लिफ्ट' देना अफसर को पड़ा भारी, विभाग ने वापस ली सरकारी गाड़ी
Department Recalls Official Vehicle
शिमला। Department Recalls Official Vehicle, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक अफसर की मानवीयता उस पर भारी पड़ गई। हुआ यूं कि उन्होंने अपने पुराने बास को सरकारी गाड़ी में लिफ्ट दे दी। इस घटना के बाद विभाग के उच्च अधिकारियों ने इतनी सख्ती दिखाई कि संबंधित अफसर से सरकारी गाड़ी की सुविधा ही वापस ले ली। अब यह मामला नौकरशाही के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
सूत्रों की मानें, एक वरिष्ठ अफसर को उस समय हैरानी हुई जब किसी सरकारी काम से बाहर जाने के लिए उन्होंने विभाग से गाड़ी मांगी और उन्हें बताया कि उनके लिए सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। यह सुनकर अफसर भी चौंक गए। बाद में उन्हें पता चला कि उनके पुराने बॉस को सरकारी गाड़ी में लिफ्ट देने की वजह से ही यह कार्रवाई की गई है।
कई वरिष्ठ अधिकारियों से मोल लिया था टकराव
बताया जा रहा है कि जिन पुराने बॉस को लिफ्ट दी गई थी वह कभी राज्य सरकार के बेहद करीबी अफसरों में गिने जाते थे और राजधानी में तैनाती के दौरान काफी प्रभावशाली रहे हैं। हालांकि अपने कार्यकाल में उन्होंने कई मामलों में अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों से टकराव मोल ले लिया था। इसी कारण नौकरशाही के भीतर उनके समर्थक और विरोधी दोनों खेमे बन गए थे।
वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ चलाए थे कानूनी दांवपेच
राजधानी में उनकी चर्चा उस समय भी खूब हुई थी, जब उन्होंने एक पुराने मामले में अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी दांवपेच चलाए थे। इस कदम से प्रदेश सरकार भी कुछ समय के लिए असहज स्थिति में आ गई थी। हालांकि उनकी ईमानदार छवि के कारण कोई भी अधिकारी सीधे तौर पर उनके खिलाफ खुलकर सामने नहीं आ पाया।
मूल विभाग से दूसरे में कर दिया था तबादला
कुछ समय पहले पदोन्नति के बाद इस अफसर का तबादला उनके मूल विभाग से दूसरे में कर दिया था, लेकिन उन्होंने वहां अभी तक ज्वाइनिंग नहीं दी। बाद में उन्हें कार्मिक विभाग के पूल में डाल दिया गया।
नौकरशाही के भीतर कई तरह की चर्चाएं
इसी बीच किसी कारण से उन्हें तुरंत कहीं जाना था और उन्होंने अपने पुराने अधीनस्थ अफसर की सरकारी गाड़ी में लिफ्ट ले ली। कहा जा रहा है कि यह बात किसी ने उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी। इसके बाद विभाग ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित अफसर से सरकारी गाड़ी की सुविधा ही वापस ले ली। अब इस कार्रवाई को लेकर नौकरशाही के भीतर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कई अधिकारी इसे नियमों की सख्ती बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अति प्रतिक्रिया मान रहे हैं।
प्रतिक्रिया पर टिकी नजर
इस मामले को लेकर संबंधित अफसर ने प्रदेश के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी जानकारी दे दी है। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब सबकी नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी अफसर को मानवीय आधार पर दी लिफ्ट भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकती है।
क्या कहते हैं मुख्य सचिव
मुख्य सचिव संजय गुप्ता का कहना है कि फिलहाल उन्हें इस मामले में ईमेल के माध्यम से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित विभाग के प्रमुख से रिपोर्ट मांगी जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।