फर्जी ST प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाला पूर्व डिप्टी रेंजर दोषी, अदालत ने 3 साल की सजा बरकरार रखी
- By Gaurav --
- Thursday, 02 Apr, 2026
Court Upholds 3-Year Jail for Ex-Deputy Ranger
Sundernagar की एक विशेष अदालत ने फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा का लाभ लेने वाले पूर्व डिप्टी रेंजर Prakash Chand की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा को सही ठहराया।
मामले के अनुसार, Prakash Chand वर्ष 1983 में Himachal Pradesh State Forest Corporation में दैनिक भोगी के रूप में टिम्बर वाचर के पद पर भर्ती हुआ था। वर्ष 1991 में उसने स्वयं को गुज्जर समुदाय से संबंधित बताते हुए अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र पेश किया, जिसके आधार पर उसकी सेवाएं नियमित कर दी गईं।
इसी फर्जी प्रमाण पत्र का लाभ उठाकर वह पदोन्नति पाते हुए डिप्टी रेंजर के पद तक पहुंच गया। Kaflog निवासी Jeet Ram की शिकायत के बाद मामले की जांच Sarkaghat के एसडीएम से करवाई गई।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी वास्तव में राजपूत समुदाय से संबंधित है, न कि गुज्जर जाति से। विभाग में जमा किए गए प्रमाण पत्र की क्रम संख्या तहसील रिकॉर्ड के अनुसार Barfi Devi नाम की महिला के नाम जारी की गई थी।
सुनवाई के दौरान तत्कालीन कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने भी अदालत में गवाही दी कि प्रमाण पत्र पर उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। अदालत ने माना कि आरोपी ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर विभाग को धोखा दिया और आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित लाभ प्राप्त किए।