Home » संपादकीय » कोरोना : झारखंड जैसी सख्ती दूसरे राज्यों में भी चाहिए

कोरोना : झारखंड जैसी सख्ती दूसरे राज्यों में भी चाहिए

कोरोना वायरस ऐसी महामारी है, जिसने न केवल व्यक्ति की जीवन प्रणाली बदल दी है, अपितु सरकारों को ऐसे निर्णय लेने के लिए मजबूर कर दिया है, जिनकी कल्पना तक नहीं की जा सकती। राज्य सरकारें मास्क न लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने आदि पर भारी जुर्माना लगा रही हैं, पंजाब सरकार ने इसे सख्ती के साथ लागू किया तो आलोचना भी हुई थी, लेकिन फिर दूसरी राज्य सरकारों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा दिए। अब पूरे देश में एक राज्य सरकार ऐसी भी है, जिसने एक अकल्पनीय जुर्माना राशि उन लोगों पर लगाने का ऐलान किया है, जोकि मास्क नहीं पहनेंगे। झारखंड सरकार ने ऐसा निर्णय लिया है। यहां कोरोना से बचाव के लिए तय नियमों का पालन न करने वालों वालों और मास्क न पहनने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है और दो साल की जेल भी हो सकती है। झारखंड की कैबिनेट ने संक्रामक रोग अध्यादेश 2020 पारित कर दिया है। राज्य सरकार का यह कदम पहली नजर में बेहद सख्त नजर आता है, लेकिन फिर कोरोना संक्रमण के बढ़ते दायरे और लोगों की लापरवाही के किस्से लगातार सामने आते देखकर ऐसे ही सख्त कदम की जरूरत महसूस होती है।
कोरोना संक्रमण के खिलाफ देश के कई राज्य बेहद गंभीर हालात में हैं। अनेक राज्यों में रोजाना सैकड़ों की संख्या में केस आ रहे हैं। ऐसे में सभी राज्य सरकारों की यह विवशता भी हो गई है कि उन्हें अपने नागरिकों को बचाना भी है वहीं उन पर जुर्माना भी लगाना है। पंजाब जैसे राज्य में सरकार को जुर्माने की राशि से भारी राजस्व हासिल हो रहा है, हालांकि सरकार यह भी कह रही है कि उसका मकसद जुर्माना वसूलना नहीं है, अपितु लोगों को संक्रमण के प्रति संजीदा बनाना है। भारी जुर्माने की वजह से लोग नियमों का पालन करते हैं। हालांकि यह और बात है कि बावजूद इसके न लोगों का घर से बाहर निकलना बंद हुआ है और न ही मास्क न लगाना। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी अब जैसे मखौल बन गया है। वैसे झारखंड में नए नियम की बात करें तो सरकार के लिए इसे लागू कराना इतना आसान भी नहीं होगा। माना जा रहा है कि इसकी सही अनुपालना कराने के लिए सबसे पहले सरकारी विभाग और पुलिस-प्रशासन के लोगों को समाज के सामने आदर्श पेश करना होगा। इसका अभिप्राय यह है कि पहले सरकारी अमले को ही मास्क पहनते हुए तमाम नियमों का पालन करके दिखाना होगा। अगर जनता को यह लगता है कि उनके सभी बड़े नेता और बड़े अधिकारी स्वयं मास्क पहनने लगे हैं, तो लोग भी प्रेरित होंगे। गौरतलब है कि अनेक राज्यों में उपचुनाव होने हैं, वहीं बिहार में तो विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में राजनीतिक गतिविधियां बेहद बढ़ गई हैं, हालांकि इसके साथ ही कोरोना से बचाव के नियमों का टूटना भी बढ़ गया है। अब कोरोना सामान्य सी बात हो गई लगती है। बावजूद इसके कि मरीजों की संख्या जहां बढ़ रही है, वहीं मृतकों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। यह तब है, जब कोई वैक्सीन तक तैयार नहीं हो सकी है। क्या ऐसे में इतना बड़ा खतरा उठाना उचित है।
गौरतलब है कि देश में महामारी का प्रकोप निरंतर बढ़ता जा रहा है और अब तक तीस हजार आठ सौ से अधिक लोगों की इसके कारण मौत हो चुकी है तथा इससे संक्रमित कुल मरीजों की संख्या बढक़र तेरह लाख से ज्यादा हो गई है। इनमें से 70 प्रतिशत संक्रमण के मामले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और गुजरात से हैं। दरअसल, कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकारों द्वारा सख्ती में बढ़ोतरी न केवल जरूरी, बल्कि स्वीकार्य भी है। कोरोना ऐसी महामारी है जोकि अनचाहे ही एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती जाती है। इसके फैलाव की एक वजह लापरवाही भी है। लोग यह नहीं समझ रहे हैं कि वे कितने भारी संकट में है। विशेषज्ञों ने माना है कि मास्क 70 फीसदी तक इस महामारी से बचाव कर रहे हैं। यानी अगर बगैर मास्क रहा जाता है तो संकट को न्योता दिया जाता है, लेकिन मास्क लगाने से महामारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। कोरोना के टेस्ट से लेकर इलाज तक बेहद महंगा है। गरीब आदमी के पास जब सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए धन नहीं है, तब कोरोना के इलाज के लिए रोजाना हजारों रुपये उपलब्ध होंगे, इसकी कल्पना ही नहीं की जा सकती। झारखंड जैसे राज्यों ने अपने अलग अस्तित्व के बाद खड़े होना सीखा है, ऐसे में महामारी की मार राज्य की अर्थव्यवस्था एवं उसके हर कार्य पर पड़ रही है। सरकार नहीं चाहती है कि कोरोना से हालात बेकाबू हो जाएं, इसलिए उसने ऐसा सख्त कदम उठाया है। जाहिर है, जनता को खुद ही यह समझ लेना चाहिए कि मास्क लगाना क्यों जरूरी है, वहीं दूसरे नियमों का पालन भी क्यों आवश्यक है। देश के बाकी राज्यों में भी लोगों को कोरोना को गंभीरता से लेना चाहिए।

Check Also

राजस्थान: कोर्ट का फैसला ही बताएगा स्पीकर कितने शक्तिशाली

राजस्थान की सियासत में जारी गतिरोध अब अपने चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel