जयपुर: पत्रकारिता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 'मर्यादा' तार-तार, छात्रा की टिप्पणी पर छिड़ा विवाद

जयपुर: पत्रकारिता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 'मर्यादा' तार-तार, छात्रा की टिप्पणी पर छिड़ा विवाद

Controversy Erupts Over Student Remark

Controversy Erupts Over Student's Remark

जयपुर: Controversy Erupts Over Student's Remark, राजधानी जयपुर के हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह, जो कभी छात्रों के सुनहरे भविष्य और शैक्षणिक उपलब्धियों का गवाह बनता था, आज एक छात्रा की 'अशोभनीय' टिप्पणी के कारण विवादों के घेरे में है। जिस मंच से डिग्रियां पाकर छात्र गौरवान्वित महसूस करते हैं, उसी मंच पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा के साथ हुई घटना ने शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है।


क्या था पूरा मामला?
समारोह के दौरान प्रोटोकॉल के तहत राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री ने चुनिंदा छात्र-छात्राओं को मंच पर बुलाकर डिग्रियां प्रदान की थीं। नियम के अनुसार, दीक्षांत समारोह में सभी छात्रों को मंच पर बुलाना संभव नहीं होता। लेकिन, वहां मौजूद कुछ छात्र-छात्राओं की जिद थी कि हर किसी को मंच पर ही डिग्री दी जाए। इस मांग को लेकर छात्रों ने नारेबाजी और अनर्गल कमेंट्स शुरू कर दिए।

एचडीयू का बेइज्जती करके इज्जत देने का बहुत-बहुत शुक्रिया

-हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय की छात्रा

मंत्री की दरियादिली और छात्रा का 'कमेंट'
जब उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा को छात्रों की इस नाराजगी का पता चला, तो उन्होंने संवेदनशीलता दिखाई। राज्यपाल महोदय को विदा करने के बाद, वे विशेष रूप से दोबारा मंच पर आए ताकि छात्रों का मान रखा जा सके। उन्होंने खुले मन से सभी को मंच पर आकर डिग्री लेने के लिए आमंत्रित किया। लेकिन, इसके बाद जो हुआ उसने समारोह की पूरी गरिमा को तार-तार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब एक छात्रा मंच पर डिग्री लेने पहुंची, तो उसने मंत्री की सदिच्छा का सम्मान करने के बजाय बेहद तीखी और अपमानजनक टिप्पणी कर दी।

उद्दंडता या जोश? उठ रहे हैं सवाल
शिक्षाविदों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि छात्र जीवन में जोश और थोड़ा बहुत विरोध स्वाभाविक है, लेकिन उसके लिए 'उचित मंच' और 'उचित अवसर' का चुनाव जरूरी है। दीक्षांत समारोह जैसा पवित्र अवसर, जहां गुरु और शासन के प्रतिनिधि आपको आपके भविष्य की चाबी (डिग्री) सौंप रहे हों, वहां इस तरह का व्यवहार 'बदतमीजी की इंतेहा' माना जा रहा है।