हिमाचल राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस में फूट पर नजर, भाजपा तैयार बैठी रणनीति के साथ
Congress on edge, BJP ready with strategy
शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव पर राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। कांग्रेस यदि राज्यसभा प्रत्याशी को लेकर एकमत दिखती है तो भाजपा सक्रियता नहीं दिखाएगी, किंतु कांग्रेस में यदि कोई विद्रोही प्रत्याशी मैदान में उतरता है तो उसे समर्थन देकर चुनाव में नया मोड़ लाएगी। यह रणनीति है भाजपा की।
यदि कांग्रेस किसी गैर हिमाचली को राज्यसभा चुनाव में उतारती है तो भाजपा उस स्थिति को भुनाने का प्रयास अवश्य करेगी। भाजपा का प्रयास होगा कि कांग्रेस हाईकमान के निर्णय से नाराज विधायकों के दम पर कुछ हासिल किया जाए। इसीलिए इस बार भाजपा चुप है। उसकी नजर कांग्रेस प्रत्याशी पर है।
पिछले चुनाव में भी थी यही स्थिति
पिछले और वर्तमान राज्यसभा चुनाव में अधिक परिवर्तन नहीं है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास 40, भाजपा के पास 25 व तीन निर्दलीय विधायक थे। इस बार कांग्रेस के पास 40 व भाजपा के पास 28 विधायक हैं। भाजपा कांग्रेस की रार और प्रत्याशी चयन के बाद ही रणनीति तैयार कर अगला कदम उठाएगी।
उसी रणनीति पर काम करने की तैयारी
पिछले चुनाव में आंकड़ा और संख्या बल कम होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन ने जीत दर्ज की थी। इससे उत्साहित भाजपा ने इस चुनाव में भी इसी रणनीति पर काम करने की तैयारी है। इसमें पार्टी को कितनी सफलता मिलती है यह तो समय तय करेगा, लेकिन दूसरे की पिच पर बैटिंग कर जीत तलाश कर रही भाजपा कांग्रेस को खेलने का मौका देती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें होंगी।
बराबर मत मिले थे मनु और हर्ष को
पिछले चुनाव में कांग्रेस ने दिग्गज नेता मनु सिंघवी को प्रत्याशी बनाया था। उन्हें कांग्रेस के 34 विधायकों के ही मत मिले थे, जबकि संख्या 40 थी। भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन को 34 मत मिले थे। दोनों के बराबर मत होने के बावजूद हर्ष महाजन ने जीत दर्ज की थी। तब पर्ची से फैसला हुआ था।