अयोध्या में शहीद जवान देवेश सिंह को शोक-सम्मान, हंसराजपुर को शहीद ग्राम का दर्जा

अयोध्या में शहीद जवान देवेश सिंह को शोक-सम्मान, हंसराजपुर को शहीद ग्राम का दर्जा

Condolences to martyr Devesh Singh in Ayodhya

Condolences to martyr Devesh Singh in Ayodhya

रुदौली (अयोध्या)। बलिदानी देवेश सिंह की स्मृति में हंसराजपुर गांव में स्मारक बनाया जाएगा। देश की सुरक्षा में तैनात अपने जवान बेटे के बलिदान पर हंसराजपुर को भी गर्व होगा। अब इस गांव को शहीद ग्राम का दर्जा मिल गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलिदानी देवेश सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके सम्मान में ये घोषणाएं की हैं।

मंगलवार को हुए अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे खाद्य एवं रसद मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने बलिदानी के पिता रमेश सिंह को सीएम की ओर से भेजा गया शोक पत्र सौंपा, जिसमें उनकी ओर से की गईं उक्त घोषणाएं शामिल थीं। पत्र में प्रदेश सरकार की ओर से बलिदानी के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी एवं देवेश के नाम से सड़क निर्माण की घोषणा की गई है।

श्रीनगर में थी तैनाती

हंसराजपुर निवासी सेना के जवान देवेश सिंह का फोड़ा से संक्रमण के चलते निधन हो गया है। वह श्रीनगर में तैनात थे, लेकिन जब उनकी तबीयत अत्यधिक खराब हुई, तब वह लद्दाख में ड्यूटी कर रहे थे। सोमवार की रात उनका शव पैतृक गांव पहुंचा।

मंगलवार काे गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। नम आंखों से पिता ने युवा पुत्र को जब मुखाग्नि दी तो वहां उपस्थित पूरा गांव मर्माहत हो उठा। सोमवार की देर रात शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया।

मंगलवार भोर होते-होते बड़ी संख्या में लोग बलिदानी के आवास पहुंच गए। अंतिम संस्कार में रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, पूर्व सांसद लल्लू सिंह, जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे, एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर, एसडीएम संतोष कुमार, सीओ रुदौली आशीष निगम, तहसीलदार विजय कुमार गुप्त, पूर्व पालिकाध्यक्ष अशोक कसौंधन, सपा नेता चौधरी शहरयार, सभासद कुलदीप सोनकर, आशीष वैश्य, प्रधान राजकुमार सिंह, संतोष सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

हमरे भइया का न लै जाव... 

तिरंगे में लिपटे इकलौते भाई का पार्थिव शरीर जैसे ही अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाने लगा तो तीनों बहनें भाई के शव से लिपट कर दहाड़ मार रोने लगीं। बहनें बार-बार बस यही कहती रहीं कि ‘हमरे भइया का न लै जाव साहब...हमरे भइया का न लै जाव’ बहनों का विलाप देख लोगों की आंखें भर आईं।

इकलौता जवान बेटा खोने वाले माता-पिता के आंसू नहीं थम रहे थे। अंतिम संस्कार के दौरान बार-बार भारत माता की जय और देवेश सिंह अमर रहे का उद्घोष गूंज रहा था। प्रधान प्रतिनिधि पवन सिंह ने बताया कि ज्योति, मधुबाला और रोशनी सहित देवेश की तीन बहनें हैं।

ज्योति और मधुबाला की शादी हो गई है, जबकि छोटी बहन रोशनी अविवाहित है। करीब 28 वर्षीय देवेश भी अभी अविवाहित थे। उनकी शादी की बात चल रही थी।