लखनऊ में ‘NIC-2026’ सम्मेलन का शुभारंभ, स्वस्थ जीवनशैली पर CM योगी का जोर
CM Yogi Emphasizes Healthy Lifestyle
लखनऊ। CM Yogi Emphasizes Healthy Lifestyle, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में कार्डियोलाजिकल सोसायटी आफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआइसी-2026’ का शुभारंभ किया।
सीएम ने कहा, तेजी से बदलती जीवनशैली और नान-कम्युनिकेबल डिजीज के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य नीति के केंद्र में अब केवल उपचार नहीं, बल्कि बचाव और उपचार दोनों का संतुलित समन्वय अनिवार्य हो गया है।
यदि देश को स्वस्थ और उत्पादक बनाना है तो चिकित्सा व्यवस्था को इलाज-केंद्रित माडल से आगे बढ़ाकर जन-जागरूकता और दिनचर्या में सुधार पर आधारित माडल की ओर ले जाना होगा, क्योंकि हमारे लिए मिलावटी खानपान और खराब जीवनशैली सबसे बड़ी चुनौती है।
प्रतिदिन छह से आठ घंटे मोबाइल पर बीत रहे
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले लोग समय पर सोते-जागते और संतुलित आहार लेते थे, जबकि अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आजकल के युवा का 24 घंटे में छह से आठ घंटे मोबाइल पर बीत रहा है, जो लाइफ स्टाइल डिजीज का प्रमुख कारण बन रहा है।
दीपावली से पहले चलाए गए अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान हजारों क्विंटल मिलावटी खोवा और पनीर बरामद हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। आज किसी भी समारोह में परोसे जा रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर निश्चित नहीं हुआ जा सकता।
नियमित व्यायाम और योग की आदत डालें
सीएम योगी आदित्यनाथ ने डाक्टरों से कहा कि ओपीडी में आने वाले मरीजों को दवा के साथ स्वस्थ दिनचर्या के महत्व के बारे में बताएं। उन्हें नियमित योग और व्यायाम की सलाह दें। प्रधानमंत्री द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और योग को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास सराहनीय है, जिसका उदाहरण 21 जून को मनाया जाने वाला ‘विश्व योग दिवस’ है।
मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि चिकित्सक ही समाज को संयमित दिनचर्या अपनाने, स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से बचने और स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित कर सकते हैं, क्योंकि जन जागरूकता ही इस बढ़ती समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है।
स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जागरूकता और उपचार दोनों स्तरों पर समान रूप से कार्य कर रही है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती, सुलभ और प्रभावी बन सकें। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से बाईपास सर्जरी, एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी हृदय रोग उपचार सुविधाएं आमजन तक पहुंचाई जा रही हैं, जिससे गरीब वर्ग को भी राहत मिली है।
श्रमिक वर्ग में सक्रिय जीवनशैली के कारण हृदय रोग अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन बदलती परिस्थितियों में समय पर स्क्रीनिंग, जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं अत्यंत आवश्यक हैं। मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे बचाव और उपचार दोनों पक्षों पर समन्वित रूप से कार्य करते हुए ठोस निष्कर्ष प्रस्तुत करें, क्योंकि स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव है।
अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी बना नई स्वास्थ्य शिक्षा का केंद्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रदेश की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी है, जिसके साथ सभी मेडिकल कालेजों को संबद्ध किया गया है। इस भव्य कन्वेंशन हाल में इतनी बड़ी कार्डियोलाजी की कान्फ्रेंस का आयोजन गर्व का विषय है और स्वयं वे इस विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर इसकी रूपरेखा तैयार करने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं। वर्चुअल उद्घाटन के बाद आज यहां आकर विशेषज्ञों से संवाद का अवसर मिलना उनके लिए विशेष रहा।
आयुष्मान भारत बना सबसे बड़ा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले गंभीर बीमारी का मतलब पूरे परिवार के लिए आर्थिक संकट होता था, क्योंकि न पर्याप्त स्वास्थ्य संस्थान थे और न ही विशेषज्ञों की उपलब्धता, लेकिन अब आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से देश के लगभग 60 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है।
इसके अलावा वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से लगभग 1400 करोड़ रुपये उपचार के लिए जनता को उपलब्ध कराए गए। इस अवसर पर सीएसआइ के प्रेसिडेंट डा. धीमान कोहली, प्रेसिडेंट इलेक्ट डा. सत्येंद्र तिवारी, जनरल सेक्रेटरी डा. बीपी सिन्हा, साइंटिफिक चेयरमैन डा. हरेंद्र कुमार बाली, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष, अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के वीसी मेजर जनरल डा. अमित देवगन, प्रो. ऋषि सेठी, प्रो. आदित्य कपूर, प्रो. शरद चंद्रा और प्रो. गौरव चौधरी समेत कई चिकित्सक मौजूद रहे।