चंडीगढ़ SYL बैठक में हरियाणा-पंजाब का फैसला; अब इस तरह निकलेगा हल! CM मान ने कहा- किसी का भी हक नहीं मरना चाहिए
Chandigarh SYL Meeting Haryana-Punjab Decision Breaking News
Punjab Haryana SYL Issue: सतलुज-यमुना लिंक नहर (SYL) का मुद्दा पंजाब और हरियाणा के बीच लगातार गरमाया हुआ है। इस बीच आज (27 जनवरी) को चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित ताज होटल में पंजाब-हरियाणा के बीच एक बार फिर SYL मुद्दे को लेकर अहम बैठक हुई है। इस बैठक में हरियाणा सीएम नायब सैनी, पंजाब सीएम भगवंत मान और दोनों राज्यों के सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी (हरियाणा), वरिंदर गोयल (पंजाब) व उच्चाधिकारी शामिल रहे। सुबह करीब पौने 10 से शुरू होकर 11 बजे तक लगभग 1 घंटे से ज्यादा यह बैठक चली। बैठक समाप्त होने के बाद सीएम सैनी और सीएम भगवंत मान ने मीडिया से बातचीत में जानकारी दी।
सीएम मान बोले- बहुत अच्छे माहौल में बातचीत
सीएम मान ने कहा, ''एसवाईएल के महत्वपूर्ण मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा के बीच बहुत ही अच्छे माहौल में बातचीत हुई है। ये मुद्दा लंबे समय से चल रहा है, चल क्या रहा है बल्कि लटक रहा है। गुरुओं की वाणी हमारा मार्गदर्शन कर रही है। हम भाई कन्हैया जी के वारिस हैं, जिन्होंने युद्ध में दुश्मनों को भी पानी पिलाया था। लेकिन हरियाणा हमारा दुश्मन नहीं है, वो तो हमारा भाई है। सीएम मान ने बताया कि बैठक में मैंने पंजाब का पक्ष रखा और हरियाणा सीएम हरियाणा का। सीएम मान ने कहा कि अब तो कागज लाने की भी जरूरत नहीं रहती। ये मुद्दा याद ही इतना हो गया है। जब भी मैं सीएम हरियाणा से मिलता हूं तो इस मुद्दे को सुलझाने की बात होती है।''
SYL बैठक में हुआ यह फैसला
वहीं सीएम भगवंत मान चंडीगढ़ SYL बैठक में लिए गए संबन्धित फैसले की जानकारी भी। सीएम मान ने बताया, ''आज ये फैसल हुआ है कि इस मुद्दे (Punjab Haryana SYL Issue) पर हरियाणा और पंजाब के अधिकारी बहुत फ्रिक्वेंटली मिलेंगे और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत करते रहेंगे। दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच महीने में 3 से 4 बैठकें भी हो सकती हैं और हर बातचीत के बाद अधिकारी अपने-अपने सीएम को रिपोर्ट करेंगे की बैठक में क्या हुआ। वहीं अधिकारियों की रिपोर्टिंग के बाद यह जरूरी नहीं की हरियाणा और पंजाब सीएम मीटिंग रखकर बात करें। हम फोन पर भी आपस में बात कर सकते हैं इस पर आगे बढ़ेंगे।''
ये मसला और झगड़ा हमारे बुजुर्गों का लगाया हुआ
सीएम मान ने कहा, ''हरियाणा और पंजाब के लोगों ने हम दोनों को जो दायित्व दिया है, उस हिसाब से हम भी चाहते हैं कि इसका कोई हल निकले। पहले हमारे बुजुर्ग जब किसी मसले पर बात करते थे या घर का बंटवारा होता है तो दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत कर ली जाती थी। ये मसला और झगड़ा भी हमारे बुजुर्गों का ही लगाया हुआ है। लेकिन अब नई जनरेशन आई है तो निपट जाएगा और निपट जाये तो ज्यादा अच्छा है। सीएम मान ने कहा कि दोनों में से किसी का भी हक नहीं मरना चाहिए। न ही पंजाब का, न ही हरियाणा का। वहीं सीएम मान ने मीडिया से कहा कि मैं माफी चाहता हूं कि आज आपको कोई ब्रेकिंग न्यूज नहीं मिलेगी''
सीएम सैनी बोले- सार्थक बातचीत हुई
इधर हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने भी मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि SYL बैठक में सार्थक बातचीत हुई है। सीएम सैनी ने कहा कि "सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SYL मुद्दे को लेकर हम साथ में बैठे और बैठक में सार्थक बातचीत हुई है। इससे पहले भी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हमने बात की थी और वहां भी सकारात्मक बातचीत हुई थी, आज भी उसी सकारात्मक वातावरण में बात हुई है। हमने निर्णय किया है कि आने वाले समय में हमारे अधिकारी स्तर पर बात-चीत होगी और जो भी निकलकर आएगा वे हमारे पास आएगा। हम बैठकर उस पर आगे बढ़ेंगे।"
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अगस्त 2025 में हुई थी पिछली बैठक
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पिछले साल अगस्त 2025 में SYL मुद्दे को लेकर पंजाब-हरियाणा के बीच अहम बैठक हुई थी। यह बैठक दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल की अध्यक्षता में की गई थी। बैठक में पंजाब सीएम भगवंत मान और हरियाणा सीएम नायब सैनी शामिल रहे थे। उस दौरान भी इस बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में सीएम मान ने कहा था कि बैठक में सकारात्मक चीजें निकली हैं। आगे बढ़ने का रास्ता बन सकता है, आज की बैठक के बाद ऐसी उम्मीद कायम है। सीएम मान ने यह भी कहा था कि मेरे द्वारा पंजाब का पक्ष रखा गया है, मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार उस पर विचार करेगी।
पंजाब-हरियाणा में टकराव की जड़ है SYL मुद्दा
सतलुज-यमुना लिंक नहर (SYL) मुद्दा बार-बार पंजाब-हरियाणा में टकराव बढ़ाने का काम करता है। यह मुद्दा दोनों राज्यों के बीच अब नासूर बन चुका है।इस मुद्दे को लेकर जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में सालों से सुनवाई चल रही है तो वहीं केंद्र सरकार की अध्यक्षता में भी पंजाब-हरियाणा के बीच SYL मुद्दे पर कई बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन न तो कोई नतीजा निकलता है और न ही कोई सहमति बन पाती है। मामला वहीं का वहीं खड़ा रहता है। पंजाब-हरियाणा के बीच दशकों से विवादित SYL मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट कड़ी टिप्पणी भी कर चुका है।
SYL पर 1966 से विवाद है
बता दें कि 1966 में पंजाब से जब अलग हरियाणा राज्य बना तभी से यह विवाद है। विभाजन के समय पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को छोड़कर सभी संपत्तियां 60 और 40 के आधार पर बांटी गईं। वहीं पानी को लेकर 10 साल के लंबे विवाद के बाद 1976 में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को अंतिम रूप दिया गया और इसी के साथ सतलुज यमुना नहर बनाने की बात कही गई। 24 मार्च 1976 को केंद्र सरकार ने पंजाब के 7.2 एमएएफ यानी मिलियन एकड़ फीट पानी में से 3.5 एमएएफ हिस्सा हरियाणा को देने की अधिसूचना जारी की थी। जिसके बाद पंजाब भड़क उठा।
इसके बाद साल 1981 में समझौता हुआ और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 8 अप्रैल 1982 को पंजाब के पटियाला जिले के कपूरई गांव में एसवाईएल नहर का उद्घाटन किया था। हालांकि, इसके बाद भी विवाद नहीं थमा बल्कि या यूं कहें कि विवाद और भी बढ़ता गया। वहीं इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस मामले को लेकर एसएडी प्रमुख हरचंद सिंह लोंगोवाल से मुलाकात की और फिर एक नए न्यायाधिकरण के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
इधर हरचंद सिंह लोंगोवाल को समझौते पर हस्ताक्षर करने के एक महीने से भी कम समय में आतंकवादियों ने मार दिया था। वहीं 1988 में मजत गांव के पास परियोजना पर काम कर रहे कई मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिससे एसवाईएल नहर का निर्माण कार्य ठप हो गया. 1990 में, आतंकवादियों ने नहर से जुड़े मुख्य अभियंता एमएल सेखरी और अधीक्षण अभियंता अवतार सिंह औलख की भी हत्या कर दी।
हरियाणा सरकार ने 1996 में सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी
यह सब देखते हुए हरियाणा सरकार ने 1996 में सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी. इसके बाद 15 जनवरी 2002 को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को एक साल में एसवाईएल बनाने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 4 जून 2004 पंजाब सरकार ने अपनी याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। हालांकि, पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं माना। पंजाब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजी नहीं हुआ और पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट-2004 बनाकर हरियाणा के साथ तमाम जल समझौते रद्द कर दिए।
इस तरह से पंजाब ने हरियाणा को पानी देने वाले समझौते को मानने से ही साफ इनकार कर दिया। 2017 में तो एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मुकदमा भी पंजाब सरकार के खिलाफ दर्ज हुआ था। बता दें कि, सतलज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर पंजाब में लगभग 121 किमी और हरियाणा में 90 किमी तक फैली हुई है, हरियाणा में नहर का 90 किलोमीटर के हिस्से में निर्माण कार्य 1980 तक पूरा हो चुका है, वहीं पंजाब में शेष 121 किलोमीटर के हिस्से में निर्माण कार्य रुका हुआ है।