CBI Seeks Permission to

590 करोड़ बैंक घोटाले में 5 IAS अफसरों पर CBI की नजर, पूछताछ के लिए मांगी अनुमति

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हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में सीबीआई जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। प्राथमिक जांच में एजेंसी को 5 आईएएस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। सूत्रों के मुताबिक, रिमांड पर लिए गए बैंक अधिकारियों और लेखा अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां साझा की हैं, जिनमें वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, एक बैंक मैनेजर की ऑडियो रिकॉर्डिंग में भी कुछ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 5 आईएएस अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति सरकार से मांगी है। बताया जा रहा है कि अनुमति से संबंधित फाइल उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है और सरकार जल्द इस पर फैसला ले सकती है।

इस मामले को लेकर सरकार के भीतर भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि अब तक जांच मुख्य रूप से बैंक अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों तक सीमित थी। लेकिन अब वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के नाम सामने आने से जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि चूंकि सरकार ने खुद यह मामला सीबीआई को सौंपा था, इसलिए पूछताछ की अनुमति रोकना आसान नहीं होगा।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज और फाइल मूवमेंट सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर नियमों को नजरअंदाज कर फैसले लेने के संकेत मिले हैं। कुछ अधिकारियों की भूमिका वित्तीय मंजूरियों, भुगतान प्रक्रिया और बैंक खातों के संचालन से जुड़ी फाइलों में जांच के घेरे में आई है।

जांच एजेंसी को कुछ कथित ऑडियो और डिजिटल रिकॉर्डिंग भी मिली हैं, जिनमें आरोपियों और अधिकारियों के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। इन रिकॉर्डिंग्स में फंड ट्रांसफर, बैंक खातों के संचालन और कार्रवाई से बचने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने के संकेत मिले हैं। सीबीआई इन रिकॉर्डिंग्स की फॉरेंसिक जांच करवा रही है और पूछताछ के दौरान इनका क्रॉस-वेरिफिकेशन करना चाहती है।

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत किसी लोक सेवक के आधिकारिक फैसलों से जुड़े मामलों में जांच या पूछताछ से पहले सरकार की अनुमति आवश्यक होती है।