CBI Files Chargesheet in ₹116
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116 करोड़ के स्मार्ट सिटी घोटाले में CBI की चार्जशीट दाखिल, 5 बैंक अधिकारियों समेत 7 आरोपी नामजद

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CBI Files Chargesheet in ₹116

नगर निगम में हुए 116  करोड़ रुपए के आई.डी.एफ.सी फर्स्ट बैंक घोटाले में  सीबीआई  ने  विशेष अदालत में  चार्जशीट  दाखिल  कर  दी  है l  नगर  निगम  की  शिकायत  पर स्मार्ट  सिटी  लिमिटेड से  जुड़ा  यह  मामला  मार्च में  सामने  आया था l  प्रारंभ  में  यह  मामला  चंडीगढ  पुलिस  की  आर्थिक अपराध  शाखा के  पास  था  जिसे  सीबीआई  को ट्रांसफर कर  दिया   गया  था l
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ की विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सात आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल है।
दायर मामले में लगे आरोपों के तहत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर 11 फर्जी एफडीआर तैयार  की  गई  l जिनकी कीमत 116.84 करोड़ रुपए से अधिक थी। दायर  मामले  के  अनुसार सरकारी पैसे को फर्जी कंपनियों में भेजने का आरोप लगाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक  नकली एफडी के बदले करोड़ों रुपए लिए थे। जांच में सामने आया कि  बैंक से जुड़े मोबाइल नंबर की पहुंच थी और संदिग्ध लेनदेन करवाने में भी आरोपियों की अहम भूमिका रही। मामले मे  6 से  7 आरोपी बनाए गए l
सीबीआई के अनुसार दोनों मामलों में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट में फंड गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी   थी। जांच  में  सामने  आया था  कि 
स्मार्ट सिटी फंड में गड़बड़ी चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड में आईडीएफसी बैंक में जमा करीब 116 करोड़ रुपए बिना अनुमति निकाले  गए और   सामने आया कि यह रकम शेल कंपनियों में ट्रांसफर की गई।  इसी तरह क्रेस्ट में भी फंड गड़बड़ी के आरोप लगे। इस मामले में पुलिस को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए आरोपियों पर केस चलाने की अनुमति चाहिए थी। स्मार्ट सिटी की सी.एफ.ओ  नलिनी मलिक और आउटसोर्स कर्मचारी अनुभव मिश्रा के खिलाफ तो प्रशासन ने मंजूरी दे दी थी l
 इस मामले में हरियाणा पुलिस ने आईडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। जांच के दौरान उसके पास से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले थे, जो पूरे फंड ट्रांजैक्शन और पैसों के ट्रेल को समझने में महत्वपूर्ण थे। माना जा रहा था कि इन सबूतों से यह स्पष्ट हो सकता है कि रकम कहां से निकाली गई, किन खातों में ट्रांसफर हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही । चंडीगढ़ पुलिस ने जांच आगे बढ़ाने के लिए हरियाणा पुलिस से कई बार सबूत मांगे, ताकि दोनों राज्यों की जांच में तालमेल बैठ सके। इसके लिए आधिकारिक पत्र भी भेजे गए, लेकिन जरूरी दस्तावेज समय पर नहीं मिले। सबूतों की कमी के कारण चंडीगढ़ पुलिस की जांच प्रभावित हो रही थी और केस की कड़ियां जोड़ने में दिक्कत आ रही थी। यही वजह रही कि मामले को निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए अंततः इसे सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया गया।
सीबीआई ने कहा कि मामलों की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।