student death: चम्पावत में तिरंगा रैली में जा रहे स्कूली छात्र को कैंटर ने कुचला, मौके पर ही मौत
student death: चम्पावत में तिरंगा रैली में जा रहे स्कूली छात्र को कैंटर ने कुचला

student death: चम्पावत में तिरंगा रैली में जा रहे स्कूली छात्र को कैंटर ने कुचला, मौके पर ही मौत

student death: चम्पावत में तिरंगा रैली में जा रहे स्कूली छात्र को कैंटर ने कुचला, मौके पर ही मौत

हल्द्वानी/चंपावत: student death: उत्तराखंड के चंपावत जनपद के लोहाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बड़ा हादसा हो गया. यहां तिरंगा यात्रा में शामिल होने जा रहे एक स्कूली छात्र को कैंटर ने कुचला दिया. जिससे छात्र की मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. घटना से आक्रोशित क्षेत्र के लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ समय के लिए जाम भी लगाया.

student death: ये है मामला:

बता दें शनिवार को गैरी गांव निवासी हिमांशु सिंह (11) जीआईसी बापरू में संकुल स्तरीय रैली में प्रतिभाग करने को जा रहा था. तभी सड़क पार करते समय उसके साथ यह दुर्घटना घटित हुई. सुबह विद्यालय द्वारा तिरंगा यात्रा निकाली जा रही थी. इसी दौरान पिथौरागढ़ डाक पार्सल ले जा रहे कैंटर ने छात्र को मल्ला बापरू के पास रौंद दिया. जिससे छात्र की मौके पर ही मौत हो गई. वाहन चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया. पुलिस चालक की तलाश में जुटी हुई है. घटना से आक्रोशित लोगों ने राजमार्ग में जाम भी लगाया. लोहाघाट थाने के एसओ जसवीर सिंह चौहान ने मौके पर पहुंचकर लोगों व छात्रों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया. पुलिस ने छात्र के शव को लोहाघाट मोर्चरी भिजवाया. जहां पंचायतनामा कर पीएम की कार्रवाई कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है.

student death: पूरे क्षेत्र में शोक की लहर

घटना के बाद से ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है. छात्र के परिवार व गांव में कोहराम मचा हुआ है. छात्र के माता-पिता, भाई-बहन बेसुध पड़े हुए हैं. छात्र 5 भाई बहनों में सबसे छोटा व परिवार का लाडला था. बताया जा रहा है कि वो आज रैली में 100/200 मीटर रेस दौड़ने जा रहा था. उसने घर में अपनी मां से मेडल जीतने का वादा किया, मगर इससे पहले वो वादा पूरा कर पाता उसके साथ ये दुर्घटना घट गई.

क्षेत्रीय विधायक खुशाल सिंह अधिकारी व पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने घटना पर दुख जताया है. ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि इतनी बड़ी रैली होने के बाद भी वहां शिक्षक मौजूद नहीं थे. जबकि शिक्षकों को बच्चों की देखभाल के लिए मौजूद रहना चाहिए था.