राजस्थान में सफाईकर्मी भर्ती पर 'ब्रेक': हाई कोर्ट सख्त, भजनलाल सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब

राजस्थान में सफाईकर्मी भर्ती पर 'ब्रेक': हाई कोर्ट सख्त, भजनलाल सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब

Brake on Sanitation Worker Recruitment in Rajasthan

'Brake' on Sanitation Worker Recruitment in Rajasthan

'Brake' on Sanitation Worker Recruitment in Rajasthan: राजस्थान हाई कोर्ट ने 2012 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं के तहत सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में हो रही देरी पर राज्य की भजनलाल सरकार से जवाब मांगा है. बताया जा रहा है कि यह देरी राज्यभर के 309 नगरीय निकायों को प्रभावित कर रही है. जिससे अलग-अलग निकायों में सफाई प्रभावित हो रही है और लोगों को परेशानी भी हो रही है. अब इसे लेकर हाई कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने इंदरराज निदानिया और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया और तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

कोर्ट ने पूछा प्रक्रिया को क्यों नहीं बढ़ाया गया

कोर्ट ने कुछ नगर निकायों में नियुक्ति आदेश जारी करने और अन्य में प्रक्रिया लंबित रखने पर सवाल उठाए. अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा कि क्यों राजाखेड़ा (धौलपुर), कोटा, राजसमंद, टोंक और चुरु में नियुक्तियां की गईं, जबकि अलवर नगर निगम में शुरू की गई प्रक्रिया को अन्य निकायों, जिनमें जयपुर नगर निगम भी शामिल है, तक नहीं बढ़ाया गया.

स्वीकृत पदों में से 23,820 सफाई कर्मचारी पद रिक्त

याचिकाकर्ताओं के वकील अभिनव शर्मा ने बताया कि राज्य में कुल स्वीकृत पदों में से 23,820 सफाई कर्मचारी पद रिक्त हैं, जो जनशक्ति की भारी कमी को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि केवल जयपुर में ही 4,077 पद पिछले 14 वर्षों से खाली हैं, जिससे राजधानी में स्वच्छता सेवाएं प्रभावित हो रही हैं.

हड़ताल के बाद जल्द नियुक्ति का दिया था आश्वासन 

याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि अधिकांश वाल्मीकि समुदाय से आने वाले उम्मीदवारों को समिति समीक्षा के बहाने लंबे समय तक विलंब का सामना करना पड़ा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में चयनात्मक नियुक्तियां की गईं. यह भी तर्क दिया गया कि 2024 में जयपुर में हुई हड़ताल के बाद शीघ्र नियुक्ति का आश्वासन देने वाले समझौते के बावजूद राज्य ने 2024–25 में भर्ती प्रक्रिया पुनः शुरू करने का प्रयास किया, जिसे बाद में वापस ले लिया गया.

याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालयों के पूर्व के निर्देशों का हवाला दिया, जिनमें 2017 के ललित कुमार मामले का आदेश शामिल है, जिसमें 2012 की भर्ती प्रक्रिया तीन माह में पूरी करने का निर्देश दिया गया था.