भागवत ने कहा—संघ को लोकप्रियता नहीं, देश की सेवा चाहिए
Bhagwat said – the Sangh does not want popularity, it wants service to the country
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद में कहा कि वैश्वीकरण का मतलब बाजारीकरण से है, जो खतरनाक है। हम वसुधैव कुटुंबकम की बात करते हैं।
जब तक सब सुखी नहीं होंगे, एक व्यक्ति सुखी नहीं हो सकता है। जीवन उपभोगवादी नहीं होना चाहिए। कहा कि पश्चिमी देशों ने जड़वाद फैलाया।
उनकी सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और बाकी को छोड़ दो, जो बाधक बने, उन्हें मिटा दो। यही काम आज अमेरिका, चीन कर रहे हैं। कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली होना पड़ेगा। दुनिया तभी मानती है जब सत्य के पीछे शक्ति हो।
सरसंघचालक ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवसाय नहीं हो सकते। यह सबके लिए सुलभ होना चाहिए। पश्चिम के लोगों ने शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया। हमारी शिक्षा व्यवस्था हटाकर अपनी थोपी। जिससे उन्हें काम करने के लिए काले अंग्रेज मिल जाएं।
जो बिगाड़ा उसको ठीक करना होगा। मैं और मेरा परिवार ही सब कुछ है, यह न सोचकर पूरे देश के लिए सोचना होगा। संघ को अंदर आकर समझना चाहिए।
संघ को पढ़कर नहीं समझा जा सकता है। संघ किसी के विरोध में नहीं है। संघ को लोकप्रियता, प्रभाव और शक्ति नहीं चाहिए। कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है।
सत्यपरक बातें सामने आनी चाहिए। अज्ञानता से भारत को हम समझ नहीं पाएंगे। उन्होने प्रामाणिकता के साथ शोध करने एवं निःस्वार्थ भाव से देश की सेवा करने की सीख दी।
कहा कि संघ को लेकर बहुत दुष्प्रचार होता है। शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सृष्टि जिन नियमों से चलती है, वह धर्म है। धूल का एक भी कण धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता है। धर्म बताता है कि हमें अकेले नहीं सबके साथ जीना है। संघ प्रमुख ने पर्यावरण के प्रति मित्र भाव से रहने की सीख दी।