बनभूलपुरा हिंसा: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख; मुख्य आरोपियों की जमानत रद, 2 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

बनभूलपुरा हिंसा: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख; मुख्य आरोपियों की जमानत रद, 2 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

Banbhulpura Violence: Supreme Court Takes Strict Stance

Banbhulpura Violence: Supreme Court Takes Strict Stance

देहरादून। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में बनभूलपुरा हिंसा मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट द्वारा मामले में आरोपितों को दी गई डिफाल्ट जमानत को रद कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई त्रुटियां की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपितों जावेद सिद्दीकी व अरशद अयूब को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।

बनभूलपुरा क्षेत्र में आठ फरवरी, 2024 को अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान आगजनी, हिंसा और पुलिस स्टेशन सहित सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी जावेद सिद्दीकी समेत अन्य पर एफआइआर दर्ज की थी। इसके अनुसार घटना में पेट्रोल बम और हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले में बीते माह अप्रैल में हाईकोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी थी। इस पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश विक्रम नाथ और संदीप मेहता ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि जांच एजेंसी ने समय पर जांच पूरी करने के लिए विधिसम्मत तरीके से समय विस्तार लिया था और इस दौरान बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए गए। कोर्ट ने हाईकोर्ट की उस टिप्पणी को गलत बताया, जिसमें जांच को धीमा और लापरवाहीपूर्ण बताया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार 90 दिनों में 65 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जो गंभीर और व्यापक मामले में पर्याप्त प्रगति दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपितों को नियमित जमानत के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता रहेगी, जिस पर ट्रायल कोर्ट अपने विवेक से निर्णय लेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आरोपित दो सप्ताह के भीतर सरेंडर नहीं करते तो ट्रायल कोर्ट उन्हें हिरासत में लेने के लिए कड़े कदम उठाए।