2040 तक चांद पर होगा भारतीय: देहरादून में बोले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला— 'जीवन से निकाल दें मुश्किल शब्द'

2040 तक चांद पर होगा भारतीय: देहरादून में बोले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला— 'जीवन से निकाल दें मुश्किल शब्द'

An Indian on the Moon by 2040

An Indian on the Moon by 2040

देहरादून। An Indian on the Moon by 2040, परेड मैदान में आयोजित दून बुक फेस्टिवल के दौरान अंतरिक्ष यात्री एवं फाइटर पायलट शुभांशु शुक्ला ने युवाओं से संवाद करते हुए उन्हें जीवन, विज्ञान और भविष्य की दिशा पर प्रेरक संदेश दिया।

कार्यक्रम में उन्होंने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रगति पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत अंतरिक्ष में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल करेगा और 2040 तक मानव अंतरिक्ष यात्रियों को चंद पर भेजने के साथ सुरक्षित वापस लाने में सक्षम होगा।

साथ ही भारत अपने स्वयं के स्पेस स्टेशन की दिशा में भी लगातार कार्य कर रहा है। शुक्ला ने कहा कि यह सब इसरो के निरंतर प्रयासों और देश की तकनीकी क्षमता का परिणाम है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि आज का भारत टेक्नोलाजी और युवा शक्ति के दम पर वैश्विक पहचान बना रहा है।

युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन से मुश्किल शब्द को निकाल देना चाहिए और अपने सपनों के लिए पूरी ताकत से प्रयास करना चाहिए। जब इरादे मजबूत होते हैं तो असंभव लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि हमारे विचार ही हमारे कार्य, भावनाओं और जीवन की दिशा तय करते हैं, इसलिए हमेशा बड़ा और सकारात्मक सोचना जरूरी है।

लड़कियों को किया प्रेरित 

महिला अंतरिक्ष यात्रियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने लड़कियों को प्रेरित किया। कहा कि महिलाओं में सभी को साथ लेकर चलने की विशेष क्षमता होती है, और अंतरिक्ष जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में टीमवर्क अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए।एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि डर हर इंसान को होता है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि हम उससे भागें नहीं बल्कि उसे समझकर आगे बढ़ें। भविष्य को लेकर चिंता अक्सर उन परिस्थितियों का निर्माण करती है जो अभी अस्तित्व में भी नहीं होतीं, इसलिए वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करना सबसे प्रभावी तरीका है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि समस्या समाधान कौशल अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और खुद को ढालने में मदद करता है।

असफलता पर उन्होंने कहा कि यह हमें धैर्य, अनुभव और सही दिशा में आगे बढ़ने की सीख देती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि किसी भी कार्य को परिणाम की चिंता किए बिना पूरी क्षमता और समर्पण के साथ करें, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति अपनी वास्तविक क्षमता को पहचान पाता है।

शुक्ला ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों को शून्य गुरुत्वाकर्षण, सीमित संसाधनों और मानसिक दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए कठोर शारीरिक प्रशिक्षण के साथ मानसिक मजबूती और टीम वर्क बेहद जरूरी होता है। अंतरिक्ष में हर निर्णय सटीक और समयबद्ध होना चाहिए, क्योंकि छोटी सी चूक भी बड़ा खतरा बन सकती है।