इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त फैसला: बैंक खुद 'जांच एजेंसी' न बनें; खाता फ्रीज करने पर बैंक पर 50 हजार का जुर्माना
Allahabad High Court's Strict Ruling
लखनऊ। Allahabad High Court's Strict Ruling, इलाहाबाद हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ ने बैंक खातों को मनमाने ढंग से फ्रीज करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंक एक ट्रस्टी के रूप में कार्य करता है, न कि निगाह रखने वाली जांच एजेंसी के रूप में।
इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने एक खाते को बिना किसी उचित कारण के फ्रीज करने पर इंडियन ओवरसीज बैंक पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान मामले में बैंक खाता किसी साइबर अपराध के कारण, जैसा कि इन दिनों प्रचलित है, फ्रीज नहीं किया गया है, बल्कि इस कारण फ्रीज किया गया है कि संबंधित बैंक स्वयं एक जांच एजेंसी में परिवर्तित हो गया है।
बैंक यह तय नहीं कर सकता कि पैसा कहां से आया, जब तक कि पुलिस, ईडी या सीबीआइ जैसी संस्थाओं से कोई औपचारिक आदेश न मिले। न्यायालय ने कहा कि इन दिनों बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। वर्तमान मामले में बैंक ने खाते को बिना किसी उचित कारण के फ्रीज किया। इस प्रकार की मनमानी कार्रवाई का प्रत्यक्ष प्रभाव में खाताधारक के दैनिक व्यावसायिक कार्य बाधित होते हैं, जिससे उसकी व्यावसायिक प्रतिष्ठा तथा आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
याची फर्म की ओर से दलील दी गई कि फार्म मछली पालन की मशीनरी का व्यवसाय करती है। उसके बैंक खाते में 16 जनवरी 2026 को 23 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से जमा हुए थे, लेकिन बैंक ने इस आधार पर खाता फ्रीज कर दिया कि खाता खोलते समय याची फर्म ने अपनी वार्षिक आय सिर्फ 5.76 लाख रुपये बताई थी तो इससे अधिक की राशि उसके खाते में कैसे जमा हो गई। वहीं, बैंक की दलील थी कि यह एक संदिग्ध लेन-देन था और मनी लाड्रिंग एक्ट के प्रविधानों के तहत उसने कार्रवाई की है।