न्यायिक उत्तरदायित्व: गलत रिमांड पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट से मांगा स्पष्टीकरण

न्यायिक उत्तरदायित्व: गलत रिमांड पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट से मांगा स्पष्टीकरण

Allahabad High Court important observation on filing FIR

Allahabad High Court strict on wrong remand,

प्रयागराज। Allahabad High Court strict on wrong remand, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीलीभीत में नियुक्त रिमांड मजिस्ट्रेट से गलत रिमांड जारी करने पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही विवेचक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ तथा न्यायमूर्ति जयकृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने मोहम्मद हारून की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उनके अधिवक्ता जीके दीक्षित व अनुराग त्रिपाठी को सुन कर दिया है। कोर्ट ने गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश निरस्त कर दिया है।

प्रकरण जहानाबाद थाने का है, जहां मोहम्मद हारून की गिरफ्तारी हुई थी और रिमांड मजिस्ट्रेट ने रिमांड आदेश दिया था। कोर्ट ने माना कि याची की गिरफ्तारी विधि सिद्धांत के अनुसार नहीं की गई। याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उमंग रस्तोगी केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय में स्पष्ट है कि गिरफ्तारी के आधार से संबंधित कालम में उसका उल्लेख होना चाहिए, लेकिन याची के मामले में अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी के आधार से संबंधित कोई कालम डीजीपी के 25 जुलाई 2025 व तीन फरवरी 2026 के सर्कुलर के अनुरूप नहीं है। इसलिए अरेस्ट मेमो और रिमांड आर्डर दोनों ही अवैधानिक है। याची को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने याची की तत्काल रिहाई और एसपी को विवेचक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही कर अगली सुनवाई तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही रिमांड मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगा है कि उमंग रस्तोगी केस में इस हाई कोर्ट और मिहिर राजेश शाह केस में सुप्रीम कोर्ट के प्रतिपादित सिद्धांतों के बारे में यदि उन्हें नहीं जानकारी है तो क्यों और ऐसा रिमांड आदेश उन्होंने कैसे कर दिया।