भारत और दक्षिण एशिया की एयरलाइंस को 2044 तक 3300 नए विमानों की जरूरत, बोइंग ने कहा- तेजी से बढ़ रही मांग

भारत और दक्षिण एशिया की एयरलाइंस को 2044 तक 3300 नए विमानों की जरूरत, बोइंग ने कहा- तेजी से बढ़ रही मांग

US Aircraft Maker Boeing

US Aircraft Maker Boeing

हैदराबाद: US Aircraft Maker Boeing: अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग (Boeing) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में भविष्यवाणी की है कि भारत और दक्षिण एशिया के विमानन बाजार में अगले दो दशकों में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिलेगी. हैदराबाद में आयोजित एशिया के सबसे बड़े नागरिक उड्डयन कार्यक्रम 'विंग्स इंडिया 2026' के दौरान जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2044 तक इस क्षेत्र की विमानन कंपनियों को लगभग 3,300 नए विमानों की आवश्यकता होगी.

विमानों की मांग और बेड़े का विस्तार

बोइंग के 'वाणिज्यिक बाजार परिदृश्य' (CMO) के अनुसार, मांग का बड़ा हिस्सा घरेलू और क्षेत्रीय मार्गों के लिए होगा. अनुमानित आपूर्ति में से लगभग 90 प्रतिशत (2,875 विमान) 'सिंगल-आइल' यानी एक गलियारे वाले विमान होंगे, जो अपनी कार्यक्षमता के लिए लोकप्रिय हैं. वहीं, लंबी दूरी की उड़ानों के लिए 395 चौड़े आकार के विमानों (Wide-body planes) की आवश्यकता होगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले 20 वर्षों में भारत और दक्षिण एशिया का विमान बेड़ा 795 से चार गुना बढ़कर 2,925 हो जाएगा.

रोजगार और बुनियादी ढांचे पर प्रभाव

विमानों की इस भारी संख्या को संभालने के लिए मानव संसाधन की भी बड़ी मांग पैदा होगी. बोइंग का अनुमान है कि 2044 तक इस क्षेत्र को 1,41,000 नए विमानन पेशेवरों की आवश्यकता होगी, जिनमें शामिल हैं:

  • 45,000 पायलट
  • 45,000 तकनीशियन
  • 51,000 केबिन क्रू सदस्य

बोइंग के प्रबंध निदेशक (वाणिज्यिक विपणन) अश्विन नायडू ने बताया कि भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता विमानन बाजार है. उन्होंने कहा कि बढ़ते मध्यम वर्ग, आर्थिक विकास और हवाई अड्डों में निवेश के कारण यात्री यातायात में 7% की वार्षिक वृद्धि होने की उम्मीद है.

निवेश और आर्थिक अवसर

इस विस्तार के लिए रखरखाव, मरम्मत (MRO), डिजिटल सेवाओं और प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में 195 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी. भारत वर्तमान में घरेलू उड़ानों के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है, और सरकार का लक्ष्य 2047 तक हवाई अड्डों की संख्या बढ़ाकर 350-400 करना है.

भारत में उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि और ई-कॉमर्स की बढ़ती भूमिका से हवाई मालवाहक बाजार को बढ़ावा मिलेगा. इससे अधिक मालवाहक विमानों की आवश्यकता होगी.