Chandigarh Mayor Saurabh Joshi: बीजेपी के सौरभ जोशी बने चंडीगढ़ के नए मेयर; कोई क्रॉस वोटिंग नहीं

बीजेपी के सौरभ जोशी बने चंडीगढ़ के नए मेयर; कोई क्रॉस वोटिंग नहीं, कांग्रेस के गुरप्रीत गाबी को 7 और आप के ढींगरा को 11 वोट मिले

Chandigarh New Mayor Saurabh Joshi Breaking News

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Chandigarh Mayor Saurabh Joshi: चंडीगढ़ के नए मेयर का ऐलान हो गया है। बीजेपी ने एक बार फिर मेयर पद पर अपना कब्जा जमाया है। वार्ड नंबर-12 से पार्षद सौरभ जोशी 18 वोट लेकर चंडीगढ़ के नए मेयर बन गए हैं। चुनाव में कोई कोई क्रॉस वोटिंग नहीं हुई। सौरभ जोशी को उनकी पार्टी के सभी 18 वोट गए। इसके अलावा आम आदमी पार्टी से योगेश ढींगरा को भी उनकी पार्टी पार्षदों के सभी 11 वोट मिले। आप से बगावत कर निर्दलीय डिप्टी मेयर के पद पर नामांकन भरने वाले पार्षद रामचंदर ने भी आप को ही समर्थन दिया।

वहीं इसी तरह कांग्रेस मेयर उम्मीदवार गुरप्रीत सिंह गाबी को भी पार्टी पार्षदों के सभी वोट हासिल हुए। साथ ही उनके पक्ष में एक वोट पार्टी सांसद मनीष तिवारी का भी रहा। इस तरह से गुरप्रीत सिंह गाबी को कुल 7 वोट मिले। लेकिन जीत के लिए न तो कांग्रेस के पास वोटों की पर्याप्त संख्या रही और न ही आम आदमी पार्टी के पास। आप और कांग्रेस दोनों से ही BJP वोटों में काफी आगे थी। जहां आंकड़ों के हिसाब से 18 वोटों के साथ बीजेपी का पलड़ा सबसे भारी रहा। सौरभ जोशी चंडीगढ़ के 32वें मेयर होंगे। मेयर पद जीतने के बाद बीजेपी खेमे में भारी जश्न का माहौल देखा जा रहा है।

हाथ उठाकर करवाई गई वोटिंग

चंडीगढ़ मेयर चुनाव के इतिहास में इस बार पहली बार हाथ उठाकर वोटिंग करवाई गई। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा नियुक्त पीठासीन अधिकारी डॉ. रमणीक सिंह बेदी की मौजूदगी में मेयर चुनाव संपन्न हुआ। पूरी चुनाव प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। वोटिंग से पहले पीठासीन अधिकारी बेदी ने तीनों पार्टियों के उम्मीदवारों और पार्षदों को नियम बता दिए थे। पीठासीन अधिकारी ने पहले ही साफ कर दिया था पार्षद वोटिंग के लिए एक बार ही हाथ उठा सकते हैं, दूसरी बार हाथ उठाया तो यह इनवैलिड माना जाएगा और उनका पहला ही वोट मान्य होगा। बता दें कि वोटिंग के दौरान पार्षदों से हस्ताक्षर के साथ उम्मीदवार का नाम भी बुलवाया गया।

बीजेपी की जीत तय मानी जा रही थी

बता दें कि पहले ही आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी की जीत तय मानी जा रही थी। नंबर गेम में बीजेपी का पलड़ा सबसे भारी था।   दरअसल इस बार मेयर चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों के बीच मुक़ाबला था। जहां इस त्रिकोणीय मुक़ाबले में संख्या बल के लिहाज से बीजेपी सीधे तौर पर सबसे मजबूत स्थिति में रही। बीजेपी की यह मजबूती और उसकी यह ताकत तब और बढ़ गई, जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन से किनारा करके अकेले-अकेले लड़ने का फैसला लिया। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस और आप दोनों ही पार्टियों के पास वोट बहुत कम थे।

ऐन मौके पर गठबंधन की अटकलें थीं

हाल ही में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन टूट गया था लेकिन इसके बावजूद इसके कई राजनीतिक मायने निकालते हुए अटकलें थीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों के ऐन मौके पर साथ आ सकते हैं और ऐसे में चुनाव नतीजे की तस्वीर बदलती हुई दिख सकती है। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस ने मेयर चुनाव अकेले लड़ा और इसके बाद सांसद मनीष तिवारी और पार्टी के सभी पार्षद नगर निगम के असेंबली हॉल उठकर बाहर चले गए। कांग्रेस ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में हिस्सा नहीं लिया।

गठबंधन न होने से बीजेपी को सीधा फायदा पहुंचा

बता दें कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन जहां बीजेपी को कांटे की टक्कर दे सकता था, गठबंधन न होना बीजेपी के लिए यह सीधा फायदा रहा। मसलन दोनों दलों के साथ आने की स्थिति में मुकाबला 18-18 की बराबरी पर पहुंच जाता। ऐसे में भाजपा को जीत के लिए यह कोशिश करनी पड़ती कम से कम एक पार्षद को अपने पाले में कर बढ़त पक्की की जाए। फिलहाल बीजेपी के लिए राह आसान रही और चंडीगढ़ में एक बार फिर बीजेपी का मेयर बन गया। बीजेपी ने पहले ही दावा किया था कि मेयर पद पर उसका कब्जा बरकरार रहेगा।

पार्षदों के वोटों का पूरा गणित समझिए

बता दें कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए नगर निगम सदन में कुल 36 वोट हैं, जिनमें 35 पार्षदों और एक सांसद का वोट शामिल है। मेयर पद जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 19 वोटों की आवश्यकता होती है। गौरतलब है कि हाल ही में आम आदमी पार्टी से 2 महिला पार्षदों के बीजेपी में आने से बीजेपी के पार्षदों की संख्या अभी 18 है। पहले पार्टी के पास पार्षदों की संख्या 16 थी। वहीं आम आदमी पार्टी से 2 पार्षदों के टूटने के बाद इस समय AAP के पास पार्षदों की संख्या 11 रह गई है। वहीं कांग्रेस के पास कुल पार्षदों की संख्या इस समय 6 है। साथ ही कांग्रेस के पास एक वोट चंडीगढ़ के वर्तमान सांसद मनीष तिवारी का भी है। यानि कांग्रेस के पास अभी कुल 7 वोट हैं।

चंडीगढ़ मेयर चुनाव के बारे में

मालूम रहे कि, चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल केवल एक साल का होता है। हर साल मेयर पद के लिए वोटिंग कराई जाती है और शहर को नया मेयर मिलता है। इस चुनाव में जनता वोट नहीं करती है। जनता द्वारा चुने हुए पार्षद इस चुनाव में वोट डालते हैं। ज्ञात रहे कि चंडीगढ़ में कुल 35 वार्ड हैं। यानि इन वार्डों के कुल 35 पार्षद हो गए। ये 35 पार्षद ही मेयर चुनाव में वोट करेंगे। मेयर चुनाव में मौजूदा सांसद का वोट भी पड़ता है। इस समय बीजेपी के पास अपना सांसद नहीं है। जबकि कांग्रेस के पास सांसद के वोट की ताकत है। इससे पहले जब किरण खेर चंडीगढ़ की सांसद थीं तो वह बीजेपी के लिए वोट करती थीं।

पिछले चुनाव में BJP ने मेयर बनाया

चंडीगढ़ में पिछला मेयर चुनाव 30 जनवरी को हुआ था। जिसमें कम नंबर होने के बावजूद बीजेपी अपना मेयर बनाने में कामयाब रही थी और हरप्रीत कौर बबला मेयर बनी थीं। दरअसल क्रॉस वोटिंग से बीजेपी को जीत मिली थी। हालांकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का पद बीजेपी के पास नहीं आया था। AAP गठबंधन के साथ इन दोनों पद पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस से जसबीर सिंह बंटी सीनियर डिप्टी मेयर और तरुणा मेहता डिप्टी मेयर बनी थीं।