एआई आधारित न्यूरल नेटवर्क से ल्यूपस जांच होगी और अधिक सटीक

एआई आधारित न्यूरल नेटवर्क से ल्यूपस जांच होगी और अधिक सटीक

AI-based neural network could make lupus

AI-based neural network could make lupus

  1. सूक्ष्म तस्वीरों का विश्लेषण कर बढ़ेगी नए पैटर्न पहचानने की क्षमता

  2. एसजीपीजीआई ने पीजीआई चंडीगढ़ और आईआईटी दिल्ली के सहयोग से विकसित की प्रणाली

लखनऊ। ल्यूपस जैसी जटिल ऑटो प्रतिरक्षी बीमारी की जांच अब और अधिक सटीक हो सकेगी। संजय गांधी पीजीआई ने एम्स नई दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़ और आईआईटी दिल्ली के सहयोग से एआइ( कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित न्यूरल नेटवर्क प्रणाली विकसित की है, जो जांच की सूक्ष्म तस्वीरों का विश्लेषण कर नए पैटर्न पहचानने के साथ इलाज की दिशा और उसकी सफलता का आकलन करने में मदद करेगी।

क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग के प्रो. रूद्रापन चटर्जी के अनुसार, ल्यूपस की पुष्टि के लिए एंटी न्यूक्लियर एंटीबॉडी (एएनए) जांच की जाती है। इस जांच में माइक्रोस्कोप के माध्यम से स्लाइड पर बनने वाले विशेष पैटर्न को देखकर बीमारी का निर्धारण किया जाता है। कई बार बहुत सूक्ष्म पैटर्न मानवीय आंख से छूट जाते हैं या उनकी पहचान में भ्रम हो जाता है। नई विकसित प्रणाली ऐसे मामलों में स्पष्ट और सटीक विश्लेषण उपलब्ध कराएगी।
पीजीआई के क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग की पूर्व प्रमुख और एम्स बीबी नगर की निदेशक प्रोफेसर अमिताभ अग्रवाल के मुताबिक अब तक इस नेटवर्क में 5 हजार से अधिक एएनए पैटर्न की तस्वीरें अपलोड की जा चुकी हैं। सहयोगी संस्थानों में हुई जांच की डिजिटल तस्वीरों को सुरक्षित कर आईआईटी दिल्ली भेजा गया, जहां विशेषज्ञों ने उन्हें प्रणाली में सम्मिलित कर प्रशिक्षण दिया। विश्लेषण के दौरान कुछ नए पैटर्न सामने आए हैं और पहले अनदेखे रहे संकेतों की भी पहचान संभव हुई है।

एम्स नई दिल्ली के प्रो. रंजन गुप्ता और पीजीआई चंडीगढ़ के डॉ. माली भावा भी इस शोध दल का हिस्सा हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पैटर्न की सटीक जानकारी मिलने से न केवल बीमारी की पुष्टि अधिक विश्वसनीय होगी, बल्कि मरीज के लिए उपयुक्त इलाज तय करने और उपचार की प्रगति पर नजर रखने में भी सहायता मिलेगी।

क्या है ल्यूपस

ल्यूपस एक ऑटो प्रतिरक्षी बीमारी है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने ही स्वस्थ ऊतकों और अंगों पर हमला करने लगती है। इससे त्वचा, जोड़ों, किडनी, हृदय और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में अत्यधिक थकान, जोड़ों में दर्द, बुखार तथा चेहरे पर तितली के आकार का दाग शामिल हैं। समय पर जांच और नियमित उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। प्रति एक लाख आबादी में लगभग 20 से 70 लोग ल्यूपस से प्रभावित हो सकते हैं।

भारत की जनसंख्या को देखते हुए यह संख्या लगभग 3 लाख से 10 लाख लोगों के बीच हो सकती है। यह बीमारी महिलाओं में पुरुषों की तुलना में लगभग 8 से 9 गुना अधिक पाई जाती है, खासकर 15 से 45 वर्ष की आयु वर्ग में। जागरूकता और जांच की सुविधाएं बढ़ रही हैं, इसलिए आने वाले वर्षों में पंजीकृत मामलों की संख्या और अधिक स्पष्ट हो सकती है।

ल्यूपस के मुख्य लक्षण

  • चेहरे पर तितली के आकार का रैश एक विशिष्ट लक्षण है।
  • बिना कारण बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना।
  • जोड़ों में दर्द और सूजन
  • सुबह के समय जोड़ों में जकड़न।
  • बुखार: बार-बार या बिना किसी इन्फेक्शन के बुखार आना।
  • बाल झड़ना और त्वचा पर चकत्ते ।
  • धूप के प्रति संवेदनशीलता ।

ल्यूपस के प्रकार

सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस : सबसे आम प्रकार, जो पूरे शरीर के अंगों को प्रभावित कर सकता है।
डिस्कोइड ल्यूपस : यह मुख्य रूप से त्वचा तक सीमित रहता है।