यूपी में दिखा अनोखा नजारा, बेटी के तलाक पर पिता ने बजवाए ढोल-नगाड़े, कोर्ट से घर तक नाचते-गाते पहुंचे परिजन

यूपी में दिखा अनोखा नजारा, बेटी के तलाक पर पिता ने बजवाए ढोल-नगाड़े, कोर्ट से घर तक नाचते-गाते पहुंचे परिजन

A unique sight witnessed in UP

A unique sight witnessed in UP

मेरठ: A unique sight witnessed in UP: तलाक को जहां दुख और बदनामी से जोड़ा जाता है, तो वहीं मेरठ में एक पिता ने अपनी बेटी के तलाक को आजादी और खुशी को जश्न में बदल दिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, गले में फूलों की खुशबू का हार और चेहरे पर सुकून ये नजारा किसी शादी से कम नहीं था, फर्क बस इतना था कि यह जश्न बेटी की एक नई जिंदगी की शुरुआत का था।

रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी इकलौती बेटी प्रणिता शर्मा का स्वागत उसी सम्मान और गर्व के साथ किया, जैसे कभी उसकी विदाई की थी। परिवार के लोग काले रंग की टी-शर्ट पहनकर, जिस पर I Love My Daughter लिखा था, खुशी से झूमते नजर आए। मिठाइयां बांटी गईं और कचहरी से घर तक का माहौल उत्सव में बदल दिया गया।

बेटी प्रणिता की शादी 2018 में हुई थी

प्रणिता की शादी 14 दिसंबर 2018 को एक आर्मी मेजर से हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों से ही हालात सामान्य नहीं रहे। समय के साथ ससुराल में व्यवहार और अधिक कठोर होता गया। मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रताड़ना ने उसकी जिंदगी को मुश्किल बना दिया। एक बेटे के जन्म के बाद भी परिस्थितियों में कोई सुधार नहीं आया। उम्मीदें टूटती गईं, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी।

आज तलाक की अर्जी पर मुहर लगा दी

आखिरकार प्रणिता ने अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता देते हुए तलाक का फैसला लिया। मेरठ फैमिली कोर्ट ने आज (4 अप्रैल 2026) इस फैसले को मंजूरी दी। इसके बाद जो हुआ, वह समाज के लिए एक संदेश बन गया, बेटी की वापसी हार नहीं, बल्कि साहस की जीत मानते हुए उसकी घर वापसी की गई।

प्रणिता जो शास्त्री नगर स्थित एक ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं और मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं, ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि सबसे जरूरी है, खुद को मजबूत बनाना। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि यदि वे किसी भी तरह की प्रताड़ना झेल रही हैं, तो चुप न रहें। शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही असली ताकत है। प्रणिता ने ये भी कहा कि बेटी की शादी की जल्दी मत करो बेटी पढ़ाओ उसे आत्मनिर्भर बनाओ, फिर उसकी शादी करो, इससे पहले नहीं।

पिता ने दिखाया समाज को आईना

प्रणिता के पिता ने साफ कहा कि मेरी बेटी कोई सामान नहीं है, जिसे भेज दिया जाए और फिर उसकी कोई जिम्मेदारी न हो। अगर वह दुखी है, तो उसे वापस लाना मेरा कर्तव्य है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने किसी तरह का मुआवजा या सामान नहीं लिया, बल्कि केवल अपनी बेटी की खुशी को चुना और उसे अपने साथ लाए। उन्होंने कहा कि आज समाज में बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार के साथ देखा जाना चाहिए, क्योंकि बेटियों को भी खुश रहने का पूरा हक है।