मेवाड़ की परंपरा का अनुपम उदाहरण: परडोदास में ऐतिहासिक मायरा
A unique example of Mewar tradition
A unique example of Mewar tradition: मेवाड़ की माटी सदा से परंपराओं, संस्कारों और रिश्तों की गरिमा के लिए जानी जाती रही है. इसी परंपरा को जीवंत करते हुए राजस्थान प्रदेश के भीलवाड़ा जिले के रायला क्षेत्र के परडोदास गांव में भाई-बहन के अटूट स्नेह का ऐसा अद्भुत उदाहरण देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को भावविभोर कर दिया.
भदाला बराना परिवार के हरदेव, छगन और सुखदेव ने अपनी बहन कमला बाई (पत्नी मोहन जी मुदा) के पुत्र-पुत्री के शुभ विवाह अवसर पर मायरा भरते हुए प्रेम, सम्मान और सामाजिक दायित्व का अप्रतिम संदेश दिया. यह मायरा केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि बहन के प्रति समर्पण, आत्मीयता और गौरव की अभिव्यक्ति बन गया.
82,72,201 रुपये का ऐतिहासिक भात
भाइयों ने बहन के आंगन में स्नेह की ऐसी वर्षा की कि पूरा गांव भावुक हो उठा-
- 26 लाख रुपये मूल्य का सोना
- 56,51,101 रुपये नकद रोकड़ी
- 21,101 रुपये चूड़ा के लिए
- इस प्रकार कुल 82,72,201 रुपये का मायरा भरकर भाइयों ने मेवाड़ की परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ दिया. गांव में हर चौपाल पर इसी मायरे की चर्चा रही.
सामाजिक सरोकार का उज्ज्वल संदेश
सिर्फ पारिवारिक प्रेम ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी इस आयोजन की विशेषता रहा. भाइयों ने 2,01,000 रुपये की राशि अगरपुरा में नवीन गौ चिकित्सालय हेतु दानस्वरूप प्रदान की. यह राशि नशा मुक्त एवं शहीद भगत सिंह गौ चिकित्सालय के संस्थापक नारायण भदाला को सौंपी गई. यह पहल दर्शाती है कि सच्चा मायरा वही है, जिसमें रिश्तों के साथ समाज की सेवा का भाव भी समाहित हो.
गणमान्यजनों की उपस्थिति
इस अवसर पर देवकरण ज्यानी (पूर्व सरपंच), छोटू बडला, सम्पत भदाला सहित अनेक गणमान्यजन एवं ग्रामीण उपस्थित रहे. सभी ने भाइयों की उदारता, बहन के प्रति उनके सम्मान और परिवार की सामाजिक प्रतिबद्धता की सराहना की.
मेवाड़ की परंपरा की जीवंत झलक
ढोल-नगाड़ों की गूंज, मंगल गीतों की मधुरता और रिश्तों की आत्मीय गर्माहट के बीच यह मायरा केवल एक रस्म नहीं रहा. यह भाई-बहन के पवित्र बंधन की भावपूर्ण अभिव्यक्ति बन गया. परडोदास का यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि धन से बढ़कर प्रेम, सम्मान और संस्कार हैं और जब इन तीनों का संगम होता है, तो इतिहास बनता है.