भारत में मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर हुई 3.93%, पेट्रोल-डीजल समेत इन चीजों के बढ़े दाम

India's retail inflation rate rose to 3.93% in May

India's retail inflation rate rose to 3.93% in May

नई दिल्ली: भारत में महंगाई एक बार फिर धीरे-धीरे पैर पसारने लगी है. सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई के महीने में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई है. इससे पिछले महीने, यानी अप्रैल में यह 3.48 प्रतिशत पर थी. हालांकि, राहत की बात यह है कि यह अब भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 4 प्रतिशत के तय लक्ष्य से नीचे बनी हुई है.

इस बार महंगाई की तुलना पिछले साल के मई महीने से नहीं की जा सकती. इसका कारण यह है कि सरकार ने जनवरी से महंगाई मापने के फॉर्मूले में बदलाव कर दिया है. अब इसके लिए साल 2024 को आधार वर्ष माना गया है, जो पहले 2012 हुआ करता था. नया फॉर्मूला साल 2023-24 में देश के परिवारों द्वारा किए गए खर्च के सर्वे पर आधारित है.

महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण

आर्थिक जानकारों का कहना है कि दुनिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश के भीतर भी ट्रांसपोर्ट और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है. इसे 'इंपोर्टेड इन्फ्लेशन' कहा जाता है.

इसके अलावा, खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बदलाव आ रहा है. पिछले साल अक्टूबर में देश में खाद्य महंगाई दर घटकर माइनस 5.02 प्रतिशत तक चली गई थी, जिसकी वजह से कुल महंगाई दर महज 0.25 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई थी. लेकिन अब खाने-पीने की चीजों के दाम फिर से बढ़ना शुरू हो गए हैं. साथ ही, अल-नीनो (El Nino) के खतरे के कारण इस साल मानसून सामान्य से कम रहने की आशंका है, जिससे आने वाले समय में खेती और फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है.

रिजर्व बैंक का रुख

बढ़ते खतरों को देखते हुए रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष (FY27) के लिए महंगाई के अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है. केंद्रीय बैंक ने 5 जून को अपनी बैठक में ब्याज दरों को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है और अपनी नीति को 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ रखा है ताकि जरूरत पड़ने पर कदम उठाए जा सकें. अच्छी बात यह है कि महंगाई की इस चुनौती के बीच भारत की आर्थिक विकास दर (GDP) काफी मजबूत है. पिछले वित्त वर्ष (FY26) में देश की जीडीपी 7.7 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह मजबूत स्थिति में दिख रही है.