उत्तराखंड-ओडिशा का आध्यात्मिक संगम: राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति से मीडिया दल की विशेष भेंट

उत्तराखंड-ओडिशा का आध्यात्मिक संगम: राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति से मीडिया दल की विशेष भेंट

A Spiritual Confluence of Uttarakhand and Odisha

A Spiritual Confluence of Uttarakhand and Odisha

भुवनेश्वर। A Spiritual Confluence of Uttarakhand and Odisha, राजधानी भुवनेश्वर में संवाद और राष्ट्रीय एकता की परंपरा का एक सजीव उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब उत्तराखंड से आये मीडिया के 15 सदस्यीय अध्ययन दल ने मंगलवार को लोक भवन में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति से शिष्टाचार भेंट की।

इस दौरान राज्यपाल के साथ सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्यों के बीच विचार, अनुभव और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सार्थक चर्चा हुई।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुन्द्रियाल के नेतृत्व में भुवनेश्वर पहुंचे मीडिया दल ने उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान पर प्रकाश डाला।

कहा कि देवभूमि उत्तराखंड अपने प्रमुख तीर्थ स्थलों, पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। ओडिशा और उत्तराखंड के बीच आध्यात्मिक विरासत और पर्यटन की दृष्टि से कई समानताएं हैं।

पुरी का जगन्नाथ मंदिर और उत्तराखंड का केदारनाथ मंदिर भारतीय आस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो देश की आध्यात्मिक एकता को दर्शाते हैं।

उत्तराखंड से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए डॉ. कंभमपति ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012–13 के दौरान राज्य का दौरा किया था।

इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के विकास मॉडल को निकट से देखा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में उत्तराखंड के लिए घोषित औद्योगिक पैकेज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे रुद्रपुर जैसे क्षेत्रों में व्यापक रोजगार के अवसर सृजित हुए।

उन्होंने देश में तीव्र गति से हो रहे अवसंरचनात्मक विकास की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के योगदान का विशेष उल्लेख किया।

इस संदर्भ में उन्होंने दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और पर्यटन, व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।