शादी का वादा, गर्भ और फिर कोर्ट का बड़ा फैसला! POCSO केस में आरोपी बरी
A promise of marriage, pregnancy, and then a significant court decision!
चंडीगढ़ की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सह फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय की जज Dr. Yashika ने 27 वर्षीय आरोपी Gurjant को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) और Protection of Children from Sexual Offences Act 2012 (पॉक्सो) की धारा 6 के तहत आरोप लगाए गए थे।
मामला क्या था
मौली जागरण थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, घटना 16 फरवरी 2024 की बताई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वह पिछले तीन-चार महीनों से आरोपी को जानती थी और उससे छिपकर मिलती थी।
उसने कहा कि आरोपी ने उसे घर बुलाया और शारीरिक संबंध बनाए, जिसके बाद उसे पेट दर्द हुआ। वह अकेले पंचकूला स्थित अस्पताल गई, जहां जांच के दौरान गर्भावस्था की जानकारी मिली और चिकित्सक ने पुलिस को सूचना दी। बाद में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।
बचाव पक्ष की दलीलें
आरोपी के अधिवक्ता Mandeep Kumar और Kashish Jain ने अभियोजन पक्ष के मामले में कई विरोधाभास उजागर किए।
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जिरह के दौरान शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि उसने प्रारंभिक चरण में आरोपी का नाम अपने परिवार या डॉक्टर को नहीं बताया था।
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उसने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान उसने अपने भाई के कहने पर दिया।
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अभियोजन पक्ष पीड़िता की आयु संबंधी ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जो पॉक्सो अधिनियम के तहत दोष सिद्ध करने के लिए आवश्यक था।
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मुख्य गवाह ने कहा कि संबंध विवाह के आश्वासन के आधार पर बने थे, जबरदस्ती नहीं।
न्यायालय का निर्णय
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा।
मुख्य गवाह द्वारा अभियोजन के कथनों की पुष्टि न किए जाने और आयु संबंधी प्रमाण के अभाव को गंभीर कमी मानते हुए न्यायालय ने आरोपी गुरजंत को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
यह निर्णय आपराधिक मामलों में “संदेह से परे प्रमाण” के सिद्धांत की पुनः पुष्टि करता है, जिसके तहत दोष सिद्ध न होने की स्थिति में आरोपी को बरी किया जाता है।