फाइनल से पहले पिता की सीख, और फिर 21 गेंदों में तूफानी अर्धशतक — अभिषेक शर्मा की कहानी

फाइनल से पहले पिता की सीख, और फिर 21 गेंदों में तूफानी अर्धशतक — अभिषेक शर्मा की कहानी

The Story of Abhishek Sharma

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The Story of Abhishek Sharma: भारत के टी20 विश्व कप जीतने के बाद बधाइयों का सिलसिला लगातार चल रहा था। पूर्व साथी खिलाड़ी और देशभर के दोस्त संदेश भेज रहे थे और पंजाब के क्रिकेट प्लेयर अभिषेक शर्मा के पिता राज कुमार शर्मा हर संदेश का जवाब दे रहे थे। लेकिन उनका मन बार-बार फाइनल से एक दिन पहले की उस शाम पर लौट जाता था।
टूर्नामेंट में अभिषेक का प्रदर्शन शुरुआत में अच्छा नहीं रहा था। उन्होंने लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट होने के बाद एक संघर्षपूर्ण 10 रन बनाए और फिर जिम्बाब्वे के खिलाफ अर्धशतक लगाकर खुद को संभाला। हालांकि स्पिन गेंदबाजों ने उन्हें कई बार परेशान किया। सेमीफाइनल में भी विल जैक्स ने उन्हें आउट कर दिया था और टूर्नामेंट खत्म होने की कगार पर था।
फाइनल से एक दिन पहले अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में अभ्यास सत्र के दौरान राज कुमार शर्मा ने अपने बेटे से शांत बातचीत की।
उन्होंने कहा, “मैंने पहले मैचों के बाद उससे ज्यादा बात नहीं की थी, लेकिन मैंने उसे सिर्फ इतना कहा— हर खिलाड़ी के करियर में उतार-चढ़ाव आते हैं। घबराना नहीं, यह दौर भी जल्द गुजर जाएगा।”
उन्होंने अभिषेक को यह भी याद दिलाया कि वह दुनिया के नंबर-1 टी20 बल्लेबाज हैं और उनकी काबिलियत ही उन्हें यहां तक लेकर आई है।
इसके बाद उन्होंने बेटे पर कोई दबाव नहीं डाला और इंतजार करते रहे।
फाइनल में अभिषेक शर्मा ने धमाकेदार अंदाज में खेलते हुए टी20 विश्व कप नॉकआउट मैच में सबसे तेज अर्धशतक जड़ दिया। उन्होंने सिर्फ 21 गेंदों में पचास रन पूरे किए। उनके 48 रन तेज गेंदबाजों के खिलाफ आए। स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उन्होंने पांच गेंदों में तीन रन बनाए और रचिन रवींद्र का शिकार बने।
अभिषेक ने सबकी सलाह सुनी, लेकिन फाइनल में मैदान पर उतरकर उन्होंने बिना किसी दबाव के स्वाभाविक खेल खेला।
राज कुमार शर्मा ने बताया कि जब अभिषेक अमृतसर लौटेंगे तो जश्न का तरीका क्या होगा। उन्होंने कहा, “हम गुरु राम दास जी द्वारा बसाए गए शहर से हैं। अभिषेक सबसे पहले स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने जाएंगे। इसके बाद गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह शहीद समेत अन्य पवित्र स्थलों पर भी जाएंगे।”
बचपन से ही अभिषेक स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ खेलने के लिए सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और रोहित शर्मा को ध्यान से देखते थे। टीवी पर, मोबाइल पर, जब भी समय मिलता था, वह इन तीनों की बल्लेबाजी का अध्ययन करते थे।
शायद इसी वजह से मुश्किल समय में युवराज सिंह का मार्गदर्शन उनके लिए बहुत स्वाभाविक रहा। युवराज ने पूरे कठिन दौर में लगभग रोज उन्हें फोन किया। दोनों के बीच बल्लेबाजी, तकनीक और स्पिन-पेस के खिलाफ रणनीति को लेकर चर्चा होती रही। टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने भी उनसे बात की और हौसला बढ़ाया।
राज कुमार शर्मा ने कहा, “अभिषेक ने अपने करियर में कभी स्पिन गेंदबाजों से डर महसूस नहीं किया। कई बार शॉट खेलने का फैसला कुछ सेकंड में लेना होता है। उसकी तकनीक में ज्यादा खामियां नहीं हैं और वह सलाह लेने से कभी हिचकिचाता नहीं है।”