विधानसभा में संजय निषाद और सपा सदस्यों के बीच तीखी बहस
A heated debate broke out between
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संजय निषाद और सपा सदस्यों में विधानसभा में तीखी बहस।
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बजट चर्चा के दौरान निषाद से पेपर छीनने की कोशिश।
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अध्यक्ष सतीश महाना ने हस्तक्षेप कर शांति बहाल की।
लखनऊ। बुधवार की शाम को विधान सभा में बजट पर चर्चा के दौरान मत्स्य मंत्री डा. संजय निषाद और सपा सदस्यों में तीखी बहस हुई। विपक्षी सदस्यों ने विधान सभा अध्यक्ष के आसन के समक्ष आकर नारेबाजी की। हंगामे के बीच संजय निषाद के हाथ से कुछ सदस्यों द्वारा पेपर छीनने की भी कोशिश की गई।
हंगामे के बीच संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने मंत्री पर हमले की कोशिश करने की बात कहते हुए पीठ से शिकायत की। संजय निषाद ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय राज्यपाल के अभिभाषण पर अपने वक्तव्य में इस्तेमाल किए गए जातिसूचक शब्द के लिए माफी मांगें। माफी नहीं मांगते हैं तो उनके खिलाफ एससीएसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
शाम लगभग छह बजे संजय निषाद ने बजट पर चर्चा के दौरान सपा और कांग्रेस पर निषादों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि निषाद समुदाय ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, मुगलों से लड़ाई लड़ी और पिछले 75 वर्षों से इन बेईमानों (कांग्रेस-सपा) से भी लड़ रहे हैं। ये जो दाहिने बैठे सपा के लोग हैं इन्होंने 30 साल की सत्ता में एक रुपया भी मछुआ समाज के लिए नहीं दिया। ये (सपाई) मछुआरों के मगरमच्छ हैं। दिल्ली से आए पैसे भी खा गए।
वह लगातार सपा पर हमलावर नजर आए। आरोप लगाया कि इन लोगों ने निषादों के जितने बड़े नेता थे, सबको मरवा दिया। फूलन देवी, जमुना निषाद आदि का नाम लिया। इन्हीं बात पर सपा सदस्यों ने विरोध शुरू कर दिया। मंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने नौकरी के साथ ही रोजी रोटी लूट ली। समाज ने अब मुझे यहां भेजा है कि इन लोगों का पर्दाफाश कर सकूं। इस बीच बहस और नोकझोंक तेज होती गई।
विरोध कर रहे सपा सदस्यों ने कहा कि मंत्रियों के लिए 10 मिनट का समय है जबकि मंत्री 18 मिनट बोल चुके हैं, वह बजट के बजाय राजनीतिक वक्तव्य दे रहे हैं। यह कहते हुए सपा सदस्य अध्यक्ष के आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। अधिष्ठाता मंजू सिवाच ने मंत्री से बात खत्म करने के लिए कहा।
इस बीच कुछ सपा सदस्य संजय निषाद की तरफ बढ़े और उनके हाथ से कागज छीनने की कोशिश करने लगे। संसदीय कार्य राज्यमंत्री ने इसे हाथापाई बताते हुए अधिष्ठाता से हस्तक्षेप की मांग की। सदन में हंगामें के बीच अध्यक्ष सतीश महाना आ गए।
उन्होंने दोनों पक्षों को शांत कराते हुए कहा कि यह बिल्कुल उचित नहीं है कि इस तरह आपस में बात न की जाए। व्यंग्यात्मक तरीके से भी अपनी बात कही जा सकती है, लेकिन शब्दों की मर्यादा बनाए रखें।