उत्तर प्रदेश: कुशल युवाओं की ताकत से बदलती तस्वीर
A Changing Landscape Powered by Skilled Youth
लखनऊ। A Changing Landscape Powered by Skilled Youth, उत्तर प्रदेश अब केवल अपनी आबादी के लिए नहीं, बल्कि अपनी 'स्किल्ड वर्कफोर्स' (कुशल कार्यबल) के लिए दुनिया भर के उद्योगों का आकर्षण केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'स्वस्थ, शिक्षित और सक्षम युवा' के विजन ने पिछले 9 वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। जहां कभी यूपी का युवा रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर था, आज वही युवा डिजिटल शक्ति और तकनीकी कौशल के दम पर 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' की आधारशिला रख रहा है।
2017 से पहले: भ्रष्टाचार और पलायन का दौर
वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के युवाओं के सामने संभावनाओं से ज्यादा चुनौतियां थीं। फरवरी 2016 के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में बेरोजगारी दर लगभग 18% के खतरनाक स्तर पर थी। सरकारी भर्तियों में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार का बोलबाला था, जिससे योग्य युवाओं का भरोसा सिस्टम से उठ चुका था। निजी क्षेत्र में निवेश की कमी और कौशल विकास की पुरानी नीतियों के कारण युवाओं के पास प्रदेश छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
पारदर्शिता से बहाल हुआ युवाओं का भरोसा
योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही सबसे बड़ा प्रहार भर्ती प्रक्रिया के भ्रष्टाचार पर किया।
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भर्ती सुधार: समूह 'ख' (अराजपत्रित) और 'ग' के पदों से इंटरव्यू खत्म कर पारदर्शिता सुनिश्चित की गई।
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सख्त कानून: परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए 'सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन निवारण कानून' लागू किया गया।
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उपलब्धि: पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के माध्यम से अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्त किया जा चुका है।
कौशल विकास: ग्लोबल स्किल हब बनता यूपी
सरकार ने युवाओं को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें 'इंडस्ट्री 4.0' के लिए तैयार किया है।
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प्रशिक्षण: आईटीआई और कौशल विकास मिशन के जरिए 25.80 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है।
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आधुनिक तकनीक: अब यूपी का युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और एडवांस्ड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में निपुण हो रहा है।
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शिक्षुता प्रोत्साहन: 1 लाख से अधिक युवा उद्योगों में सीधे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिससे वे किताबी शिक्षा के साथ व्यावहारिक अनुभव भी पा रहे हैं।
डिजिटल क्रांति: 2 करोड़ युवाओं का लक्ष्य
'स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना' के माध्यम से प्रदेश के युवाओं के हाथों में डिजिटल हथियार सौंपे गए हैं।
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वितरण: अब तक 49.86 लाख टैबलेट और स्मार्टफोन बांटे जा चुके हैं, जिसका लक्ष्य 2 करोड़ युवाओं तक पहुँचना है।
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प्रभाव: इन उपकरणों ने ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी वैश्विक शिक्षा और ऑनलाइन रोजगार के अवसरों से जोड़ दिया है।
आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता
इन नीतियों का सबसे बड़ा प्रमाण गिरती बेरोजगारी दर है। जो दर 2016 में 18% थी, वह आज न्यूनतम 2.21% पर आ गई है। उत्तर प्रदेश अब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि एक 'ग्लोबल स्किल हब' के रूप में उभर रहा है, जहाँ की युवा शक्ति ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के सपने को हकीकत में बदलने के लिए तैयार है।