यूपी तबादला नीति 2026: पारदर्शिता, राहत और सख्ती का संतुलन
A Balance of Transparency, Relief, and Strictness
पति-पत्नी को एक ही जिले में तैनाती देने पर जोर
दिव्यांग कर्मियों को मनचाहा तबादला देने का प्रावधान
लंबे समय से एक ही पटल पर तैनात कर्मियों का होगा ट्रांसफर
विभागाध्यक्षों को तबादले के लिए मिलेगा एक माह का समय
लखनऊ। A Balance of Transparency, Relief, and Strictness, योगी आदित्यनाथ सरकार ने तबादला नीति तैयार कर ली है। उत्तर प्रदेश तबादला नीति 2026 को कैबिनेट से मंजूरी दिलाने के बाद शीघ्र ही लागू किया जाएगा। इसके तहत एक ही जगह पर तीन वर्ष से अधिक समय से जमे कर्मचारियों को हटाया जाएगा और दिव्यांगों को बड़ी राहत दी जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद 2026-27 के लिए नई ट्रांसफर नीति तैयार कर ली गई है। इसे कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही लागू किया जाएगा। तबादला नीति के तहत समूह क व ख के 20 और समूह ग व घ के 10 प्रतिशत कर्मचारियों के तबादले हो सकते हैं। विभागीय मंत्रियों के अनुमोदन से मई के अंत तक स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
योगी आदित्यनाथ सरकार का ट्रांसफर पॉलिसी का मुख्य मकसद प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना और लंबे समय से एक जगह जमे हुए अधिकारियों-कर्मचारियों को स्थानांतरित करके नई ऊर्जा लाने का है। तबादला नीति के अनुसार किसी जिले में तीन वर्ष और मंडल स्तर पर सात वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों का तबादला अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
एक ही पद या सीट पर वर्षों से बैठे कर्मचारियों को भी दूसरे स्थान या विभाग में भेजा जाएगा। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और कार्यप्रणाली को सुस्त होने से बचाने में मदद मिलेगी। नई नीति के अनुसार, समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों के लिए अधिकतम 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे, जबकि समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के लिए यह सीमा दस प्रतिशत रखी गई है। जरूरत पड़ने पर विभागीय मंत्री की विशेष अनुमति से इन सीमाओं को बढ़ाया जा सकता है।
दिव्यांग कर्मचारियों को विशेष राहत
मानवीय संवेदना को ध्यान में रखते हुए दिव्यांग कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारी सामान्य तबादलों से छूट प्राप्त कर सकेंगे। यदि कोई दिव्यांग कर्मचारी स्वयं तबादला चाहता है तो उसे अपनी पसंद के जिले में प्राथमिकता के आधार पर तैनाती दी जाएगी। जिन कर्मचारियों के परिवार में गंभीर रूप से दिव्यांग सदस्य- खासकर मंदबुद्धि या अक्षम बच्चे हैं, उन्हें भी उनकी इच्छा के अनुसार तैनाती देने का प्रस्ताव है।
पति-पत्नी को एक या निकटवर्ती जिले में तैनाती
सरकारी सेवा में कार्यरत पति-पत्नी को यथासंभव एक ही जिले या निकटवर्ती जिलों में तैनात करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन आसानी से हो सके। समूह ‘क’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनाती नहीं दी जाएगी और यदि पद मंडल स्तर का है तो गृह मंडल में भी नहीं भेजा जाएगा।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
तबादला नीति के तहत संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कर्मचारियों को किसी भी संवेदनशील पद पर नहीं लगाया जाएगा। यह फैसला भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत लिया गया है। आकांक्षी जिलों और विकास खंडों में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरा जाएगा, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों। विभागाध्यक्षों को तबादला प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। यह नई नीति प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित करेगी।
उच्च स्तरीय बैठक में मसौदे पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और कर्मचारियों के बीच उचित घुमाव सुनिश्चित होगा।