82 couples tied the knot in the Nirankari mass marriage ceremony organised in the holy presence of Satguru

सतगुरु के पावन सान्निध्य में आयोजित निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह में 82 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे

82 couples tied the knot in the Nirankari mass marriage ceremony organised in the holy presence of S

82 couples tied the knot in the Nirankari mass marriage ceremony organised in the holy presence of S

82 couples tied the knot in the Nirankari mass marriage ceremony organised in the holy presence of Satguru- चंडीगढ़/पंचकुला /मोहाली/सांगलीI निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन सान्निध्य में आयोजित भव्य सामूहिक विवाह समारोह में महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से 82 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। यह समारोह महाराष्ट्र के 59वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के विधिवत समापन के उपरांत, सांगलवाड़ी (सांगली) स्थित समागम स्थल पर आयोजित किया गया।

इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में पारंपरिक जयमाला के साथ-साथ निरंकारी विवाह की विशेष पहचान ‘सांझा-हार’ भी प्रत्येक जोड़े को मिशन के प्रतिनिधियों द्वारा पहनाया गया। इसके पश्चात आदर्श गृहस्थ जीवन की प्रेरणा देने वाली निरंकारी लावें पठन की गईं।

अपने पावन आशीर्वचनों में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने नवविवाहित वर-वधुओं को शुभकामनाएँ प्रदान करते हुए गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों को समझकर आपसी सहयोग, सम्मान, प्रेम और समर्पण के साथ जीवन पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। सतगुरु माता जी ने कहा कि गृहस्थ में रहकर सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए आध्यात्मिकता की राह पर निरंतर सत्संग, सेवा एवं सिमरण से जुड़े रहें तथा एक-दूसरे के सहयोग से अपनी भक्ति को और अधिक सुदृढ़ बनाएं।

समारोह के दौरान सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी ने वर-वधुओं पर पुष्प-वर्षा कर अपना दिव्य आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर उपस्थित परिजनों एवं साध संगत द्वारा भी पुष्प-वर्षा की गई, जिससे समूचा वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण हो गया। यह दृश्य वास्तव में अलौकिक एवं अविस्मरणीय था।

इस शुभ अवसर पर महाराष्ट्र के सांगली, सातारा, कोल्हापुर, सोलापुर, धाराशिव, मुंबई, ठाणे, पुणे, डोंबिवली, पालघर, छत्रपति संभाजीनगर, अहिल्यानगर, धुले, जलगांव, नासिक, लातूर, बीड, परभणी, नागपुर, वर्धा, गोंदिया, रत्नागिरी एवं सिंधुदुर्ग; उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, गाजीपुर एवं प्रयागराज (इलाहाबाद); कर्नाटक के बेलगावी एवं उडुप्पी (कोंडापुर); तथा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर (सरगुजा) सहित विभिन्न स्थानों से कुल 82 युगल सम्मिलित हुए। सामूहिक विवाह के उपरांत सभी के लिए समागम स्थल पर भोजन की समुचित व्यवस्था की गई थी।

उल्लेखनीय है कि सादा शादियों की इस परंपरा के अंतर्गत बड़ी संख्या में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं उच्च शिक्षित युवक-युवतियाँ वर-वधू के रूप में सम्मिलित हुए और सतगुरु की पावन छत्रछाया में उनकी दिव्य शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए निरंकारी पद्धति के अनुसार सादगीपूर्ण विवाह कर समाज के समक्ष एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।

निसंदेह, सादा शादियों का यह अद्भुत दृश्य जाति-वर्ण की विषमताओं को समाप्त कर एकत्व और समानता का सुंदर संदेश देता है, जो कि निरंकारी मिशन के मूल सिद्धांतों का भी प्रतीक है।