शिमला: 74 वर्षीय मदन गौतम का 'महादान'; IGMC को सौंपी देह, अब ट्रेनी डॉक्टर करेंगे शोध
4-Year-Old Madan Gautam's 'Great Donation
शिमला। 4-Year-Old Madan Gautam's 'Great Donation, इंसानियत और समाज सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए 74 वर्षीय मदन गौतम ने अपने निधन के बाद भी चिकित्सा शिक्षा में योगदान देने का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने अपनी डेड बॉडी इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज आईजीएमसी को दान की है। अब मेडिकल के ट्रेनी डॉक्टर उनके शरीर पर अध्ययन और शोध कर सकेंगे।
बता दें, 2013 में गौतम ने अपने शरीर का देहदान करने के लिए पंजीकरण करवाया था। निधन के बाद अपना शरीर अस्पताल को दान कर दिया। मेडिकल के छात्र मानव शरीर की संरचना को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और भविष्य में मरीजों के इलाज में अधिक दक्ष बनते हैं।
परिजनों ने बताया कि मदन गौतम हमेशा समाज सेवा के कार्यों में आगे रहते थे। उन्होंने जीवनभर दूसरों की मदद करने का प्रयास किया। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद शरीर को जलाने या दफनाने के बजाय यदि उसे चिकित्सा शिक्षा के लिए उपयोग में लाया जाए तो यह समाज के लिए अधिक उपयोगी साबित होगा।
आईजीएमसी प्रशासन ने भी इस मानवीय पहल के लिए परिवार का आभार जताया और कहा कि ऐसे कदम समाज में जागरूकता फैलाने में मदद करते हैं। उन्होंने अन्य लोगों से भी अपील की कि वे देहदान जैसे पुनीत कार्य के लिए आगे आएं।
आईजीएमसी अस्पताल में अभी तक 11 देहदान दे चुके है। वहीं 452 लोगों ने देहदान का पंजीकरण करवाया है। अस्पताल में इसके लिए देहदान समिति बनी हुई है। इसमें लोग पंजीकरण करवा सकते है।